Swami Vivekananda Educational Quotes: स्वामी विवेकानंद धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, सामाजिक विज्ञान और साहित्य के ज्ञाता थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनका असल नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। उन्हें विवेकानंद नाम उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। बता दें कि स्वामी जी 25 साल की उम्र में ही सांसारिक मोह माया त्याग कर संन्यासी बन गए थे। उन्होंने 39 साल की अल्पायु में ही दुनिया को अलविदा कह दिया था। हालांकि, उनके विचार (Swami Vivekananda Hindi Quotes) और कार्य आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। ऐसे में आज हम आपके लिए स्वामी विवेकानंद के कुछ कोट्स लेकर आए हैं, जो आपको प्रेरित करने का काम करेंगे। यहां पढ़ें स्वामी विवेकानंद के कोट्स (Swami Vivekananda Famous Quotes), अनमोल विचार।
Swami Vivekananda Quotes
- दिन में एक बार अपने आप से बात करें, अन्यथा, आप इस दुनिया में एक उत्कृष्ट व्यक्ति से मिलने से चूक सकते हैं।
- ताकत जीवन है, कमजोरी मृत्यु है। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु है। प्रेम जीवन है, घृणा मृत्यु है।
- चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।
Swami Vivekananda Quotes
- जो सत्य है, उसे साहस पूर्वक निर्भीक होकर लोगो से कहो। उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस और ध्यान मत दो।
- जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
- एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
- हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।
- जब तक जीना, तब तक सीखना क्योंकि अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।
- उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये।
Swami Vivekananda Quotes
- तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना है। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही है।
- अपने जीवन में जोखिम उठाएं। यदि आप जीतते हैं तो आप नेतृत्व कर सकते हैं, यदि आप हारते हैं तो आप मार्गदर्शन कर सकते हैं।
Swami Vivekananda Hindi Quotes: योग-वेदांत की शिक्षा
स्वामी विवेकानंद ने 19वीं शताब्दी के अंत में विश्व मंच पर हिंदू धर्म को एक मजबूत पहचान दिलाई थी। पश्चिमी देशों को योग-वेदांत की शिक्षा से अवगत कराने का श्रेय स्वामी जी को ही जाता है।
