Success Story: सासाराम के कसीम हैदर ने लफ्जों से पाया मुकाम, रिजेक्शन को ताकत बना छुआ आसमान

Sayyed Qaseem Haider Success story: बिहार के सासाराम में जन्मे और नजीबाबाद में पले-बढ़े कसीम हैदर ने अपनी मेहनत और लगन से बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। कसीम की शुरुआती पढ़ाई सासाराम, रोहतास में हुई, लेकिन आठवीं के बाद वो अपनी मां के घर नजीबाबाद, बिजनौर आ गए। आज के युवाओं के लिए उनकी कहानी प्रेरणा है।

Sayyed Qaseem Haider Success story: बिहार के सासाराम में जन्मे और उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद में पले-बढ़े कसीम हैदर ने अपनी मेहनत और लगन से बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। कसीम की शुरुआती पढ़ाई बिहार के सासाराम और रोहतास में हुई। यहां से आठवीं कक्षा करने के बाद वह अपनी मां के घर नजीबाबाद आ गए। फिल्मी दुनिया में कदम रखना किसी भी छोटे शहर के लड़के के लिए आसान नहीं होता, लेकिन कसीम ने अपने हौसले और संघर्ष से अपने लिए जगह बनाई है और पहचान पाई है। कसीम हैदर को दादा साहेब फाल्के आइकान अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है

Qaseem Haider

Qaseem Haider

कैसे शुरू हुआ सफर

कसीम ने सबसे पहले धार्मिक कार्यक्रमों में एंकरिंग करना शुरू किया। एंकरिंंग के लिए स्क्रिप्ट वह खुद लिखते और उसके शायरियों का प्रयोग भी करते। एक दिन वह मंच पर थे और एक मशहूर शायर ने उनसे कहा कि कुछ अपना भी सुनाओ। तब कसीम के पास शब्द नहीं थे और उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पडा। तब उन्होंने ठाना कि एक दिन अपना लिखा दुनिया को सुनाएंगे। उन्होंने कलम उठाई और लिखना शुरू किया। अभिनेता बनने का सपना लेकर वह मुंबई पहुंचे लेकिन जब भी ऑडिशन देने जाते तो या तो पैसे मांगे जाते या ताने मिलते।

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