बिना हाथों के हौसले की उड़ान, पैरों से टाइपिंग कर पास की सहायक ग्रेड-03 परीक्षा, बने सरकारी क्लर्क

Sant Kumar Mishra Success Story: मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में पदस्थ संतकुमार मिश्रा ने यह साबित कर दिया कि शरीर की कमी कभी सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकती। जन्म से ही बिना हाथों के होने के बावजूद उन्होंने न केवल उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि सहायक ग्रेड-03 की परीक्षा पास कर शासकीय सेवा में जगह बनाई।

Sant Kumar Mishra Success Story: हौसला अगर बुलंद हो तो किस्मत भी सलाम करती है। मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में पदस्थ संतकुमार मिश्रा ने यह साबित कर दिया कि शरीर की कमी कभी सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकती। जन्म से ही बिना हाथों के होने के बावजूद उन्होंने न केवल उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि सहायक ग्रेड-03 की परीक्षा पास कर शासकीय सेवा में जगह बनाई। 36 वर्षीय संतकुमार मिश्रा वर्तमान में कृषि विभाग अंतर्गत एसडीओ कार्यालय में पदस्थ हैं। उन्होंने M.A. तक की पढ़ाई पूरी की और नवंबर 2016 में सहायक ग्रेड-03 (क्लर्क) के पद पर नियुक्त होकर सरकारी सेवा में प्रवेश किया। उनका यह सफर संघर्ष, संकल्प और आत्मविश्वास की ऐसी कहानी है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा है।

Sant Kumar Mishra Success story: संत कुमार मिश्रा की कहानी

Sant Kumar Mishra Success story: संत कुमार मिश्रा की कहानी

जहां लोग बहाने ढूंढते हैं, वहां संतकुमार बनते हैं उदाहरण

दोनों हाथों के बिना संतकुमार मिश्रा पैरों से कंप्यूटर पर टाइपिंग करते हैं, कलम पकड़कर लेखन कार्य करते हैं और फाइलों का संधारण भी पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। उनकी कार्यकुशलता देखकर कोई भी दंग रह जाए। जहां कई लोग संसाधनों के बावजूद काम से कतराते हैं, वहीं संतकुमार हर दिन अपने काम को ईमानदारी और दक्षता से अंजाम देते हैं। उन्होंने कभी अपनी शारीरिक स्थिति को कमजोरी नहीं बनने दिया। उनका मानना है कि कमी शरीर में नहीं, सोच में होती है।

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