Resham Kamboj Success Story: सफलता अक्सर भौतिक उपलब्धियों से मापी जाती है लेकिन रेशम कंबोज ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। फैशन इंडस्ट्री में एक सफल करियर बनाने के बाद उन्होंने आध्यात्मिकता की राह चुनी और आज एक आध्यात्मिक गुरु, हीलर और TEDx स्पीकर के रूप में लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। वह लोगों को आत्म-ज्ञान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ने में सहायता कर रही हैं और लोगों के दैनिक जीवन की परेशानियों को दूर कर रही हैं। रेशम कंबोज दो बार TEDx स्पीकर रह चुकी हैं और उन्होंने अपने चर्चित भाषण में इस धारणा को चुनौती दी कि केवल शैक्षणिक प्रदर्शन ही सफलता की कुंजी है। उनकी बातें युवाओं, प्रोफेशनल्स और उद्यमियों को प्रेरित कर रही हैं कि वे सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर अपनी राह खुद बनाएं।
Resham Kamboj Success Story
ग्लैमर से आत्मजागृति की ओर
रेशम कंबोज ने मुंबई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की थी। करियर में तेजी से सफलता मिलने के बावजूद, उनके भीतर एक अधूरेपन की भावना बनी रही। निजी संघर्षों के कारण उन्होंने जीवन को गहराई से समझने की कोशिश की और इस आत्मखोज ने उन्हें आकाशिक रिकॉर्ड्स तक पहुंचाया जिसके माध्यम से वह लोगों तक उनकी समस्या का समाधान पहुंचाती हैं। यहां वह लोगों की आत्मा की यात्रा को समझने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती हैं।
रेशम का आध्यात्मिक मंच
अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए, रेशम ने Tarot Tree of Life नाम से एक आध्यात्मिक प्लेटफॉर्म की स्थापना की है, जहां वह आत्म-ज्ञान और जीवन के रहस्यों को समझने की कला सिखाती हैं तो जीवन की समस्याओं के समाधान हेतु आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए टैरो रीडिंग और आत्म-जागृति और मानसिक शांति की प्रक्रिया में सहायता के लिए आध्यात्मिक मेंटरशिप सिखाती हैं। रेशम कंबोज को प्रतिष्ठित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम इंस्पिरेशन अवार्ड 2024 से सम्मानित किया जा चुका है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को मान्यता देता है जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे समाज में सकारात्मक और प्रभावशाली बदलाव आए हैं।
करियर को लेकर क्या कहती हैं रेशम
रेशम कहती हैं कि स्वयं की आत्म-जागरूकता और आंतरिक विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, करियर का चयन बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि अपने जुनून से करना चाहिए। युवाओं से वह कहती हैं कि सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर अपनी राह खुद बनाएं।
