Rajasthan School News: राजस्थान में स्कूली शिक्षा को नई दिशा देने के लिए सरकार ने 'नाम से लेकर काम तक' कई बदलावों का खाका तैयार किया है। अब सरकारी स्कूलों के टॉपर्स को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर उनकी सफलता का प्रचार किया जाएगा वहीं छात्रों को सम्मानजनक नाम देने से लेकर जातिसूचक शब्दों पर रोक तक सामाजिक सुधार की पहल भी होगी। शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिए नशे में आने वाले शिक्षकों पर नजर रखी जाएगी, जबकि पढ़ाई में सुधार के लिए बोर्ड परीक्षा दो बार देने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही 'वंदे मातरम' से शुरुआत, 'जन गण मन' से समापन, प्रवेश उत्सव के जरिए हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने, एलुमनाई मीट, पीटीआई के हर पीरियड में खेल गतिविधि कराने, स्कूलों को जमीन के पट्टे और आरटीई के जरिए गरीबों को प्राथमिकता जैसे कदमों से शिक्षा व्यवस्था को व्यापक रूप से बदलने की तैयारी है।
राजस्थान स्कूली शिक्षा में होगा बड़ा बदलाव
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि इस बार के बोर्ड परीक्षा परिणामों ने ये साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। जहां पहले टॉपर्स की सूची में प्राइवेट स्कूलों का दबदबा रहता था, वहीं अब सरकारी स्कूलों के छात्र भी शीर्ष स्थानों पर पहुंच रहे हैं। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि ये बदलाव न केवल शिक्षा विभाग की नीतियों का परिणाम है, बल्कि शिक्षकों और छात्रों की मेहनत का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि राजस्थान जो देश में 14वें पायदान पर था अब चौथे स्थान पर आ गया है।
12वीं बोर्ड परीक्षा का रहा शानदार रिजल्ट
राज्य में इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा में करीब 12 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 11500 से अधिक छात्रों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए हैं, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये आंकड़ा दर्शाता है कि छात्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और पढ़ाई के प्रति गंभीरता भी आई है। शिक्षा विभाग इसे गुणवत्ता सुधार का संकेत मान रहा है और इसे आगे बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रहा है।
इस बार के परिणामों में सबसे प्रेरणादायक कहानी एक ऐसे छात्र की रही, जो दोनों हाथों से दिव्यांग है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने 600 में से 600 अंक प्राप्त कर 100 प्रतिशत स्कोर किया। ये उपलब्धि न केवल उसके संघर्ष और आत्मविश्वास को दर्शाती है, बल्कि हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है।
होनहार छात्रों बनेंगे प्रेरणा का रूप
सरकार अब होनहार छात्रों को प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बना रही है। जिला और ब्लॉक स्तर पर होर्डिंग, बैनर और पोस्टर के माध्यम से इन टॉपर्स का प्रचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ये है कि समाज में सरकारी स्कूलों के प्रति सकारात्मक माहौल बने और ज्यादा से ज्यादा अभिभावक अपने बच्चों को इन विद्यालयों में भेजने के लिए प्रेरित हों। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां कुछ अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूलों में दाखिला दिला रहे है।
शिक्षा विभाग ने पाया कि कई छात्रों के नाम अटपटे, निरर्थक या अनुचित हैं, जो उनके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे करीब 2000-3000 नामों की पहचान की गई है। अब शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों से संवाद कर बच्चों के लिए अच्छे और अर्थपूर्ण नाम सुझाएं, ताकि उनका आत्मसम्मान बना रहे। कुछ मामलों में छात्रों के नाम के साथ जातिसूचक और असम्मानजनक शब्द जोड़ दिए जाते हैं, जिसे बदलने के लिए पहले भी सरकार प्रयास कर चुकी है। अब फिर से इस दिशा में पहल करते हुए 'वाल्मीकि' या सम्मानजनक गोत्र जैसे विकल्प सुझाए जाएंगे ताकि सामाजिक सम्मान बना रहे और भेदभाव की भावना खत्म हो।
शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अब अनुशासन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो शिक्षक किसी भी प्रकार के नशे या दुर्व्यसन में लिप्त हैं और स्कूल में इस स्थिति में आते हैं, उनकी सूची तैयार की जाएगी. हालांकि अभी सख्त कार्रवाई का निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन भविष्य में इस पर कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
'वंदे मातरम' से होगी दिन की शुरुआत
अब राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम की शुरुआत 'वंदे मातरम' से होगी और दिन का समापन 'जन गण मन' के साथ किया जाएगा। इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को अब अपने अंकों में सुधार का एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा। पहली परीक्षा के 45 दिन बाद दूसरी परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें छात्र अपने कमजोर विषयों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. हालांकि, जो छात्र पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहेगा, उसे दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी।
नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है और फिलहाल प्रवेश उत्सव चल रहा है। इस अभियान का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी सक्रियता से इसमें भाग लें और कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। घुमंतू और वंचित वर्ग के बच्चों के पास कई बार पहचान पत्र नहीं होता, जिससे उनका एडमिशन रुक जाता है. उनके लिए भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे बच्चों को पहले प्रवेश दिया जाए और बाद में दस्तावेज पूरे किए जाएं, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। शिक्षकों को चेतावनी दी गई है कि वो प्रवेश उत्सव में अपना योगदान दे, जो शिक्षक इसमें भाग नहीं लेंगे उनके नाम की भी सूची तैयार की जाएगी।
एलुमनाई मीट का होगा आयोजन
सरकारी स्कूलों में अब एलुमनाई मीट आयोजित की जाएगी, जिसमें पुराने छात्रों को बुलाया जाएगा। इससे वर्तमान छात्रों को प्रेरणा मिलेगी और पूर्व छात्र भी अपने विद्यालय के विकास में योगदान दे सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि वार्षिकोत्सव की तर्ज पर ही अब एलुमनाई मीट शुरू की जाएगी। ताकि अच्छे मुकाम पर पहुंच चुके पूर्व छात्र वर्तमान छात्रों के लिए प्रेरणा बने और अपने स्कूल की प्रगति में भी योगदान दें।
छात्रों का शारीरिक और मानसिक विकास पर होगा ध्यान
अब पीटीआई शिक्षकों की भूमिका को और सक्रिय बनाया जाएगा। उन्हें हर पीरियड में किसी न किसी कक्षा के छात्रों को खेल गतिविधियों में शामिल करना होगा, जिससे सभी छात्रों का शारीरिक और मानसिक विकास हो सके। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब तक पीटीआई की भूमिका अनुशासन बनाने के तौर पर देखी जाती थी, लेकिन अब उन्हें प्रत्येक पीरियड में किसी न किसी कक्षा के छात्रों को स्पोर्ट्स एक्टिविटी करानी होगी। इस दौरान उन्होंने पीटीआई भर्ती में हुए फर्जीवाड़े को लेकर जांच जारी होने की बात कहते हुए कहा कि एसओजी और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन पर किसी भी तरह का दया का भाव नहीं रहेगा, वो तो खुद सौभाग्य से उस जाति में पैदा हुए हैं जहां दया का भाव होता ही नहीं।
प्रदेश के करीब 37 हजार सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास जमीन का आधिकारिक पट्टा नहीं है। अब सरकार इन स्कूलों को जमीन का अधिकार देने के लिए अभियान चला रही है, जिससे भविष्य में किसी तरह की कानूनी समस्या न आए। शिक्षा मंत्री ने बताया कि संबंध में पंचायती राज और जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं।
97% स्कूल सही तरीके से चल रहे हैं
वहीं बुधवार को जयपुर में एक निजी स्कूल संचालक की ओर से फीस, किताबें और ड्रेस के पैसे लेकर स्कूल पर ताला लगाकर फरार होने का मामला सामने आया है। इस पर शिक्षा मंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि शिक्षा मंत्री ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर कहा कि सभी निजी स्कूलों को गलत नहीं ठहराया जा सकता। 97% स्कूल सही तरीके से काम कर रहे हैं, जबकि केवल 2-3% में ही अनियमितताएं हैं, जिन पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
आरटीई के तहत अब वास्तविक गरीब बच्चों को लाभ देने के लिए चयन प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि स्कूलों को अधिकार दिया जाएगा कि वे जरूरतमंद छात्रों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि इसके लिए कुछ बैरिगेड्स लगाने पर काम किया जा रहा है ताकि वास्तविक गरीब को लाभ मिले। भविष्य में यदि ऐसा कोई छात्र जो आरटीई के प्रावधानों में नहीं आ रहा होगा, उसका नाम स्वत: विलोपित भी हो जाएगा।
आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर राज्य में उत्साह का माहौल की बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बाड़मेर जिले में पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण करने आ रहे हैं। ये एक प्रमुख विकास परियोजना है, जिसे 'भाग्यरेखा' कहा जा रहा है और इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
