Padma Shri Awardee Hindi Maithili Writer Dr Usha Kiran Khan Family, husband, Age, News, Death, Religion: हिंदी और मैथिली साहित्य की सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ उषा किरण खान का बीमारी की वजह से निधन हो गया। उन्होंने अपनी अंतिम सांस पटना में ली। वे पिछले काफी समय से बीमार थी। डॉ उषा किरण का अंतिम संस्कार 12 फरवरी को सुबह 11.30 बजे पटना के दीघा घाट पर किया जाएगा। यदि आप भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए उनकी प्रसिद्ध रचनाएं कौन सी हैं।
उषा किरण खान का निधन
उनके लेखन में मिथिला का इतिहास, कला, संस्कृति और समाज का वर्णन दिखता था।
डॉ. उषा किरण खान के उपन्यास
पानी पर लकीर, फागुन के बाद, सीमांत कथा, रतनारे नयन (हिंदी)
अनुत्तरित प्रश्न, हसीना मंजिल, भामति, सिरजनहार (मैथिली)
डॉ. उषा किरण खान के कहानी संग्रह
गीली पाक, कासवन, दूबजान, विवश विक्रमादित्य, जन्म अवधि, घर से घर तक (हिंदी)
कांचहि बांस (मैथिली)
डॉ. उषा किरण खान के नाटक
कहां गए मेरे उगना, हीरा डोम (हिंदी)
फागुन, एकसिर, ठाढ़, मुसकौल बला (मैथिली)।
डॉ. उषा किरण खान के बाल नाटक
डैडी बदल गए, नानी की कहानी, सात भाई, चिड़ियां चुग खेत (हिंदी)
घंटी से बान्हल राजू, बिरडो आबिगेल (मैथिली)
डॉ. उषा किरण खान के बाल उपन्यास
लड़ाकू जनमेजय।
डॉ. उषा किरण की जीवन परिचय
डॉ. उषा किरण का जन्म 7 जुलाई, 1945 को बिहार के दरभंगा जिले में हुआ था। उनके पिता जगदीश चौधरी स्वतंत्रता सेनानी थे जबकि उनके पति ने पुलिस विभाग में सेवा दी।
डॉ. उषा किरण की उपलब्धियां
डॉ. उषा किरण में मैथली व हिंदी दोनों में लिखने की रुचि रही, लेकिन उनकी मातृभाषा मैथली थी। उन्हें उनके उत्तम कार्यों के लिए सर्वोच्च सम्मान 'पद्मश्री' (2015 में) से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा उन्हें बिहार सरकार के राजभाषा विभाग के हिंदी सेवा सम्मान और महादेवी वर्मा सम्मान; दिनकर राष्ट्रीय पुरस्कार, कुसुमांजली पुरस्कार, विद्या निवास मिश्र पुरस्कार आदि से सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ उषा किरण को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मान 'भारत भारती' से भी नवाजा जा चुका है।
