दिल्ली से NEET पेपर लीक मामले में आज एक बड़ी अपडेट आने वाली है। राउज एवेन्यू कोर्ट आज 17 जुलाई 2026 को इस घोटाले के दो बड़े नामों - दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। दोनों फिलहाल 24 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की सुनवाई स्पेशल CBI जज अजय गुप्ता की अदालत में होगी।
पूरा मामला क्या था?
ये कहानी शुरू हुई 12 मई 2026 को। एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। आरोप था - NEET UG का पेपर लीक।
CBI ने इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। दिनेश और विकास भी उसी लिस्ट में हैं । CBI का आरोप है कि खेल की शुरुआत मांगीलाल बिवाल से हुई। मांगीलाल ने अपने बेटे विकास के लिए पेपर का जुगाड़ करने के लिए शुभम खैरनार से संपर्क किया। जांच में विकास के मोबाइल से लीक पेपर भी मिला था। CBI के मुताबिक मांगीलाल ने ये पेपर यश यादव से 10 लाख रुपये में खरीदा था। पूछताछ में पता चला कि विकास और यश की जान-पहचान राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी।
लीक पेपर ऐसे घूमा एक हाथ से दूसरे हाथ
CBI की चार्जशीट के मुताबिक ये पूरी चेन ऐसे चली: शुभम खैरनार → यश यादव → मांगीलाल बिवाल → विकास बिवाल → दिनेश बिवाल और यहीं नहीं रुका। आरोप है कि मांगीलाल ने इस लीक पेपर को 12 लाख रुपये प्रति छात्र के हिसाब से कई और मेडिकल एस्पिरेंट्स को बेचकर मोटा मुनाफा भी कमाया।
केस से जुड़ी 2 चर्चित बातें
पेपर लीक की पुष्टि के बाद 12 मई वाली NEET UG परीक्षा रद्द कर दी गई थी। बाद में NTA ने दोबारा परीक्षा कराई। इसी केस के आरोपी यश यादव को कोर्ट ने 21 जून की री-एग्जाम में बैठने की इजाजत दी थी। साथ ही 22 जून को अपनी बहन की शादी के लिए पैरोल भी मिली थी। NTA के DG का कहना है कि री-एग्जाम पूरी तरह साफ-सुथरी रही और कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
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3 कानूनी पॉइंट्स जो आज की सुनवाई में अहम रहेंगे
1. नया एंटी-पेपर लीक कानून
सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है। इस केस में धोखाधड़ी के साथ संगठित अपराध की धाराएं भी लग सकती हैं। ऐसे मामलों में कोर्ट जमानत देने में बहुत सख्ती बरतता है। आज जज देखेंगे कि CBI के पास मोबाइल डेटा, चैट और डिजिटल सबूत कितने मजबूत हैं।
2. सीकर का कोचिंग कनेक्शन
आरोपियों का तार सीकर से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे गिरोह कोचिंग हब में दबाव में आए छात्रों और पैरेंट्स को टारगेट करते हैं। आगे जांच कोचिंग संचालकों तक भी जा सकती है।
3. डिजिटल सबूत और पैसों का ट्रेल
CBI का सबसे बड़ा सबूत है विकास के फोन से बरामद पेपर। इसे कोर्ट में "डिजिटल रिकवरी" कहते हैं। CBI जमानत का विरोध इस आधार पर भी करेगी कि बाहर आने पर आरोपी सबूत या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा 10 लाख और 12 लाख के लेन-देन का बैंक ट्रेल भी केस की दिशा तय करेगा।
आगे क्या?
आज कोर्ट दिनेश और विकास की जमानत पर फैसला ले सकता है या अगली तारीख दे सकता है। नोट: इस केस की ऑफिशियल अपडेट के लिए सिर्फ Rouse Avenue Court की वेबसाइट या CBI के आधिकारिक बयान पर भरोसा करें।
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