उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़ी छात्राओं के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में संचालित ऐसे पाठ्यक्रम, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या कम है, उनमें भी मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत संबंधित पाठ्यक्रम में टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं का चयन किया जाएगा। इस योजना की खास बात यह है कि किसी पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण मेधावी छात्राएं लाभ से वंचित नहीं होंगी।
यूपी सरकार की फ्री स्कूटी योजना
मीडिया रिपोर्ट और विभाग की तैयारी के मुताबिक, कम से कम एक पात्र मेधावी छात्रा को स्कूटी का लाभ देने का प्रयास किया जाएगा। यानी यदि किसी पाठ्यक्रम में छात्राओं की संख्या इतनी कम है कि टॉप पांच प्रतिशत का चयन करना मुश्किल हो, तब भी प्रतिभाशाली छात्रा को योजना से बाहर नहीं किया जाएगा।
दरअसल, प्रदेश सरकार की ओर से मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त स्कूटी देने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों से आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए हैं। अलग-अलग पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या, उनके परीक्षा परिणाम और प्राप्त अंकों की जानकारी मांगी जा रही है।
400 करोड़ रुपये का बजट
स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग के पास करीब 400 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध बताया जा रहा है। विभागीय योजना के अनुसार, पहले चरण में करीब 50 हजार छात्राओं को स्कूटी का लाभ दिया जा सकता है। आगे मेधावी छात्राओं की संख्या बढ़ने पर बजट में भी जरूरत के अनुसार वृद्धि की जा सकती है।
80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक वालों पर नजर
विभाग की ओर से जुटाए जा रहे आंकड़ों में खास तौर पर उन छात्राओं की जानकारी ली जा रही है, जिन्होंने 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल किए हैं। स्नातक प्रथम और द्वितीय वर्ष के परीक्षा परिणामों के आधार पर भी मेधावी छात्राओं का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की संख्या एक से भी कम निकलने की स्थिति बन रही है। ऐसे मामलों को लेकर विभाग नियमों में व्यावहारिक बदलाव की तैयारी कर रहा है, ताकि योजना का उद्देश्य प्रभावित न हो।
फिलहाल विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों से प्राप्त आंकड़ों को अपडेट और सत्यापित करने का काम चल रहा है। इसके बाद पात्र छात्राओं की सूची तैयार की जाएगी। योजना लागू होने पर इसका उद्देश्य सिर्फ छात्राओं को सम्मान देना नहीं, बल्कि उनकी उच्च शिक्षा तक पहुंच और आवागमन को आसान बनाना भी होगा।
