राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान यानी एनआईओएस से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से 18 महीने का डीएलएड करने वाले सेवारत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ऐसे शिक्षकों को सहायक अध्यापक भर्ती की चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अभिषेक पाठक समेत 44 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। मामला सहायक अध्यापक भर्ती के विज्ञापन संख्या 5/2026 से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत तय समय-सीमा में सेवारत अप्रशिक्षित शिक्षक के रूप में एनआईओएस के ओडीएल यानी ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग माध्यम से डीएलएड कर चुके हैं।
एनआईओएस से डीएलएड करने वाले सेवारत शिक्षकों को बड़ी राहत
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनके डीएलएड कोर्स को एनसीटीई से मान्यता प्राप्त थी। इसके बावजूद सहायक अध्यापक भर्ती में उनके डिप्लोमा को अनिवार्य शैक्षिक योग्यता के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा था। इस कारण बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक आवेदन और भर्ती प्रक्रिया से वंचित हो रहे थे।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति प्रदान की। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राहत केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। समान योग्यता और परिस्थितियों वाले अन्य सेवारत अभ्यर्थियों को भी आवेदन का अवसर देने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि यदि आवश्यकता हो तो आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने पर भी विचार किया जाए, ताकि योग्य अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकें। यह फैसला एनआईओएस से 18 महीने का डीएलएड करने वाले उन सेवारत शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से अपने डिप्लोमा की मान्यता को लेकर असमंजस में थे। अब भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता खुलने से बड़ी संख्या में शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले भर्ती विज्ञापन की अन्य शर्तों और संबंधित विभाग की ओर से जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है। आगे की प्रक्रिया और समान योग्यता वाले अन्य अभ्यर्थियों के लिए आवेदन का मौका देने को लेकर विभाग के अगले आदेश पर सभी की नजर रहेगी।
