Lal Bhadur Shastri Jayanti 2023: 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के अलावा भारत रत्न, पूर्व प्रधनमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती मनाई जाती है। लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (Lal Bhadur Shastri Biography) में हुआ था। उनके पिता मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे, माता रामदुलारी गृहंणी थी। शास्त्री जी को काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त हुई थी, उनके नेतृत्व में भारत ने साल 1966 में पाकिस्तान को करारी शिकस्त (Lal Bhadur Shastri Biography In Hindi) दी थी।
Lal Bhadur Shastri Jayanti 2023: लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से दिलचस्प बातें
बता दें जब लाल बहादुर शास्त्री जी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद प्रधानमंत्री का पद संभाला तो एक तरफ देश अनाज के संकट से जूझ रहा था, वहीं दूसरी ओर भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया था। यही कारण था कि उन्होंने देश के जवानों और किसानों को अपने कर्म और निष्ठा के प्रति सुदृढ़ रहने के लिए जय जवान जय किसान का नारा दिया। इस नारे को भारत का राष्ट्रीय नारा भी कहा जाता है।
शास्त्री जी अपनी सादगी के पर्याय थे। उनकी सरलता व सादगी की आज भी मिसाल दी जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए भी वह अपने परिवार का पालन पोषण वेतन और भत्ते से करते थे। एक बार रेलमंत्री के पद पर रहते हुए शास्त्री जी काशी गए, जब वे वापस लौट रहे थे तो उनके एक सहयोगी ने शास्त्री जी के कान में धीरे से कहा कि आपका कुर्ता फटा हुआ है। शास्त्री जी ने इस पर कहा कि गरीब का बेटा हूं ऐसे रहूंगा तो गरीब का दर्द समझ सकूंगा। यहां हम आपके लिए शास्त्री जी के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से लेकर आए हैं, जो आज भी आपको गर्व की अनुभूति करवाएंगे।
Lal Bhadur Shastri Biography: कार खरीदने के लिए लिया था 5000 का लोन
लाल बहादुर शास्त्री का पूरा जीवन सादगी का मिसाल रहा है। बता दें शास्त्री जी ने कभी निजी इस्तेमाल के लिए सरकारी कार का इस्तेमाल नहीं किया था। जब शास्त्री जी गृह मंत्री के पद पर थे तो उनके बच्चे तांगे से स्कूल जाया करते थे, वहीं गृह मंत्रालय में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के बच्चे अपनी निजी गाड़ियों से स्कूल आते थे करते थे। बच्चे अक्सर शास्त्री जी से सवाल करते थे। जब वह प्रधानमंत्री बने तो बच्चों ने उनसे कार खरीदने की जिद की। इसके बाद शास्त्री जी ने अपने निजी सचिव से फिएट कार की कीमत पता करने के लिए कहा। उस समय इस कार की कीमत12000 रुपये थी। शास्त्री जी के पास महज 7000 रुपये थे और बाकी की कीमत अदा करने के लिए उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से लोन लिया था।शास्त्री जी की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद उनकी पत्नी ललिता शास्त्री से लोन माफ करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। आपको बता दें ललिता शास्त्री ने पेंशन से मिलने वाले पैसों से कार की किश्त अदा की।
