Inspirational Story of Tuhin Dey: कहते हैं इरादे अगर बुलंद हो तो सफलता जरूर हासिल होती है। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले तुहिन डे की कहानी भी ऐसी ही है। तुहिन डे का गले से नीचे का शरीर लकवाग्रस्त है, लेकिन उनके हौसले की प्रशंसा हर तरफ है। तुहिन ने मुंह से लिखकर विश्व की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल IIT JEE की परीक्षा को क्रैक करके इतिहास रच दिया है।
मुंह से पेन चलाकर JEE पास होने वाले तुहिन डे
पश्चिम बंगाल के रहने वाले तुहिन का हाथ-पैर-धड़ कुछ भी काम नहीं करता, लेकिन उनका दिमाग ऐसा है कि आज देश-विदेश में उनकी चर्चा है। तुहिन की पढ़ाई को लेकर ललक ऐसी है कि दुनियाभर के छात्रों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। आइए उनके जीवन पर एक नजर डालते हैं।
सेरेबल पाल्सी रोग से पीड़ित
पश्चिम बंगाल के रहने वाले तुहिन डे 21 साल के हैं। वो सेरेबल पाल्सी रोग से पीड़ित हैं। सेरेब्रल पाल्सी का मतलब ऐसे लक्षणों के एक समूह से है जिनमें चलने में कठिनाई होती है। इसे एक तरह का लकवा भी कह सकते हैं। उनके शरीर में गले से नीचे का कोई भी हिस्सा काम नहीं करता है।
तुहिन की अब तक 20 सर्जरी हो चुकी है। उनकी हड्डियों को सीधा करने के लिए आर्टिफिशियल प्लेटें लगाई गई हैं। वो व्हील चेयर पर ही रहते हैं। तुहिन बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल हैं। यही वजह है कि उन्होंने 12वीं की परीक्षा साइंस स्ट्रीम से पास की है।
मुंह से लिखते हैं तुहिन
तुहिन डे मुंह से पेन पकड़कर लिखते हैं। वो सिर्फ लिखते ही नहीं बल्कि फोन और कंप्यूटर भी मुंह से ही इस्तेमाल करते हैं। वो अभी बंगाल के खड़गपुर में स्थिक इडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज बीटेक कर रहे हैं।
JEE परीक्षा पास
तुहिन डे ने दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल JEE Main और JEE एडवांस्ड परीक्षा पास की है। इंजीनियरिंग हब कहे जाने वाले राजस्थान के कोटा में रहकर तुहिन ने भी जेईई परीक्षा की तैयारी की है। वो मशहूर कोचिंग एलन में पढ़ाई कर चुके हैं। तुहिन ने JEE Main और JEE Advanced परीक्षा पास की है।
राष्ट्रपति से सम्मानित
साल 2012 और 2013 में तुहिन को NTSE में स्कॉलर रहने के चलते तत्कालीन राष्टपति प्रणब मुखर्जी सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय की तरफ से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
तुहिन बताते हैं कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा महान साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग से मिली है। बता दें कि साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग मोटर न्यूरोन नाम की बीमारी थी, जो काफी हद तक सेरेबल पाल्सी रोग जैसी ही होती है। तुहिन एस्ट्रो फिजिक्स में रिसर्च करना चाहते हैं। उनका सपना वैज्ञानिक बनने का है।
