राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण (Delhi AQI) का स्तर एक बार फिर खतरनाक और गंभीर (Severe) श्रेणी में पहुंच गया है। दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता में आई भारी गिरावट को देखते हुए प्रशासन हरकत में आ गया है। बिगड़ते पर्यावरण, वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि प्राथमिक कक्षाओं यानी कक्षा 5 तक के लिए सभी स्कूलों को अब 'हाइब्रिड मोड' (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों) में संचालित किया जाएगा। यह आदेश एहतियातन उठाया गया कदम है, जिसे दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत के प्राथमिक विद्यालयों पर भी अनिवार्य रूप से लागू किया है।
बिगड़ते AQI के बीच दिल्ली-NCR के स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू (Photo - AI/Newsroom Verified)
GRAP Stage-III की पाबंदियां और मौसम का हाल
दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण (Stage III) की सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में हवा की रफ्तार बेहद कम या लगभग शून्य रहने की संभावना है। हवा के स्थिर होने से पोल्यूटेंट्स वातावरण में जमे रहेंगे, जिससे AQI और अधिक बिगड़ सकता है। पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जब तक GRAP-III की पाबंदियां प्रभावी रहेंगी, तब तक स्कूलों को हाइब्रिड मोड का पालन करना होगा। यह व्यवस्था स्कूलों की मर्जी पर निर्भर नहीं है, बल्कि अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें - नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में ऑब्जर्वर बनने का शानदार मौका
किन कक्षाओं पर लागू होगा आदेश?
कक्षा 1 से 5 तक हाइब्रिड मोड का निर्देश केवल प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए जारी किया गया है। अभिभावक चाहें तो बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं या घर से ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुन सकते हैं।
कक्षा 6 से 12 तक कक्षा 6वीं और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए फिलहाल कोई नया निर्देश जारी नहीं हुआ है; उनकी कक्षाएं पूर्ववत चलती रहेंगी।
स्कूलों की पूर्ण बंदी नहीं वर्तमान में स्कूलों को पूरी तरह बंद करने का कोई आदेश नहीं है।
अभिभावकों की चिंता और एयर प्यूरीफायर की बहस
प्रदूषण के इस दौर में स्कूलों में स्वच्छ हवा की व्यवस्था को लेकर अभिभावकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में किए गए एक सर्वे में अभिभावकों से पूछा गया कि क्या वे क्लासरूम में एयर प्यूरिफायर या साफ हवा की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त शुल्क देने को तैयार हैं या फिर यह पूरी तरह से स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होनी चाहिए। अधिकतर माता-पिता का मानना है कि बच्चों को सुरक्षित और सांस लेने योग्य माहौल देना शैक्षणिक संस्थानों का बुनियादी दायित्व है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें - महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ने जारी की 10वीं और 12वीं की डेटशीट
स्मॉग के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी टिप्स
सुबह और शाम के समय जब स्मॉग का असर सबसे अधिक होता है, बच्चों को बाहर खेलने या आउटडोर खेल गतिविधियों में जाने से रोकें। यदि बच्चों का बाहर निकलना जरूरी हो, तो उन्हें साधारण कपड़े के मास्क की बजाय अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क पहनाएं। बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए उन्हें एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार, गुनगुना पानी और गुड़/तुलसी का सेवन कराएं।
