Board Exam 2023: मल्लेश्वरम प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की एक छात्रा 9 मार्च 2023 को बुर्का पहनकर परीक्षा देने पहुंची। इनकार करने पर छात्रा बुर्का पहनकर परीक्षा देने की जिद पर अड़ी रही। जब प्रिंसिपल ने छात्रा को समझाया, तब वह इसे हटाने को तैयार हुई और परीक्षा में बैठी। बता दें, कर्नाटक में कक्षा 12 के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा शुरू हो गई है। छात्रों ने कन्नड़ और अरबी विषयों के लिए अपनी परीक्षा दी। हालांकि एक छात्रा आखिरी समय तक इस बात पर अड़ी रही कि उसे हिजाब पहनकर परीक्षा देने की इजाजत दी जाए।
बोर्ड परीक्षा के दौरान हिजाब पहनने की नहीं मिली अनुमति
हालांकि अधिकारियों ने उसके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, लेकिन छात्रा अड़ी रही। हालांकि, परीक्षा ड्यूटी पर मौजूद प्राचार्य ने छात्रा से बात की और उसे नियमों के बारे में बताया। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि उसने उसे यह भी बताया कि परीक्षा देना उसके लिए कितना महत्वपूर्ण है, जिसके बाद वह इसे हटाने के लिए तैयार हो गई।
शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कई बार कहा है कि हिजाब या धर्म के प्रतीक किसी भी पोशाक को पहनने वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
क्या था नियम करें चेक
हाल ही में 3 मार्च को एक खबर आई थी, जिसके मुताबिक कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बी.सी. नागेश ने सभी छात्रों को यूनिफॉर्म पहनकर परीक्षा देने के लिए कहा था। हिजाब इसका हिस्सा नहीं है। उन्होंने आगे कहा था कि जो लोग हिजाब पहनकर परीक्षा देना चाहते हैं, उन्हें परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पत्रकारों से बात करते हुए शिक्षा मंत्री बी.सी. नागेश ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि सभी छात्रों को यूनिफॉर्म पहनकर परीक्षा में शामिल होना चाहिए। हिजाब इसका हिस्सा नहीं होगा। मंत्री नागेश ने आगे दावा किया कि हिजाब प्रतिबंध के बाद परीक्षा में बैठने वाले मुस्लिम छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, हिजाब पर प्रतिबंध के बाद, अधिक संख्या में मुस्लिम छात्राएं परीक्षा में शामिल हुईं और मुस्लिम छात्राओं के नामांकन में वृद्धि हुई है।
बन गया अंतरराष्ट्रीय मुद्दा
बता दें, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, और जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है। कई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हुईं क्योंकि उन्हें हिजाब पहनने और परीक्षा लिखने की अनुमति नहीं थी। कर्नाटक में हिजाब संकट अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया क्योंकि यह कानून और व्यवस्था की समस्या और सांप्रदायिक मुद्दे में बदल गया।
