नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने मध्य प्रदेश के चार B.Ed कॉलेजों में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग और वेरिफिकेशन कमेटी का गठन किया है। इन गड़बड़ियों में कॉलेजों का अपनी बताई गई जगहों से काम न करना और बुनियादी सुविधाओं वाली चीजें शामिल हैं। बता दें 15 जुलाई के एक आदेश में, NCTE ने पांच सदस्यों वाली कमेटी को वर्किंग दिनों के अंदर एक विस्तृत फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट में दस्तावेज और वीडियो सबूत भी होने चाहिए। इस कमेटी के प्रमुख सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के पूर्व वाइस चांसलर H.C.S. राठौर हैं।
मध्य प्रदेश के चार B.Ed कॉलेजों की होगी जांच, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन
यह कमेटी बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन B.Ed कॉलेजों में गंभीर गड़बड़ियों की मीडिया रिपोर्टों के बाद बनाई गई थी। शुरुआती जांच में पता चला कि एक चौथा B.Ed कॉलेज भी उसी जगह से चल रहा था, इसलिए कमेटी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर उसमें चौथे कॉलेज को भी शामिल कर लिया।
कमेटी में ये सदस्य शामिल
कमेटी के सदस्यों में शामिल हैं आशिमा मंगला, जॉइंट सेक्रेटरी, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) भगवती प्रसाद कलाल, डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी, शिक्षा मंत्रालय; J.P. सिंह, डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी, मध्य प्रदेश सरकार का एक प्रतिनिधि और विंग कमांडर विजय राणा, रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजनल कमेटी (NCTE) शामिल हैं।
कब बनी थी कमेटी
NCTE अधिकारियों के अनुसार, कमेटी 15 जुलाई को बनाई गई थी और 17 जुलाई को जांच शुरू करने के लिए मध्य प्रदेश पहुची। NCTE ने एक बयान में कहा, "उन्होंने सभी कॉलेजों की फिजिकल वेरिफिकेशन की है। शुरुआती जांच के दौरान पता चला कि पहले बताए गए तीन कॉलेजों के अलावा, एक और कॉलेज भी उसी जगह से चल रहा था। इसलिए, चार कॉलेजों की जांच की जा रही है।
नोटिफिकेशन के अनुसार, कमेटी को टीचर एजुकेशन संस्थानों की ऑन-साइट फिजिकल वेरिफिकेशन करने का काम सौंपा गया है, जिसमें जियो टैग की गई वीडियोग्राफी और फोटोग्राफिक डॉक्यूमेंटेशन शामिल होगा। यह कमेटी मीडिया में बताई गई शिकायतों की जांच करेगी और ऑन-साइट मिली जानकारी की तुलना संस्थानों द्वारा जमा किए गए रिकॉर्ड से करके असल स्थिति का पता लगाएगी।
इन सभी चीजों की भी होगी जांच
समिति NCTE एक्ट 1993, NCTE रेगुलेशन और तय नियमों व मानकों के पालन की भी जांच करेगी। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, पढ़ाने-लिखाने की सुविधाएं, लैब, ज़मीन की उपलब्धता, फैकल्टी की संख्या और मान्यता से जुड़ी दूसरी शर्तें शामिल हैं।
इनपुट ANI
