FMGE विवाद पर NBEMS का रुख: मानकों में समझौता नहीं, पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी

FMGE को लेकर उठ रहे सवालों के बीच NBEMS ने अपना रुख स्पष्ट किया है। बोर्ड अभ्यर्थियों की जायज चिंताओं पर सुधार के लिए तैयार है, लेकिन मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी न्यूनतम दक्षता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा।

विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए आयोजित होने वाली फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) को लेकर जारी विवाद के बीच नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने साफ किया है कि वह अभ्यर्थियों की वास्तविक और जायज चिंताओं पर विचार करने को तैयार है, लेकिन भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी न्यूनतम दक्षता के मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। दरसअल, जून 2026 में आयोजित FMGE परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा की कठिनाई, वीडियो आधारित सवालों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद NBEMS की ओर से गठित तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा को अधिक पारदर्शी और अभ्यर्थी-अनुकूल बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। समिति की अध्यक्षता एयर मार्शल (डॉ.) पवन कपूर (सेवानिवृत्त) ने की।

FMGE Controversy

विशेषज्ञ समिति ने FMGE को साल में तीन बार आयोजित करने की संभावना पर विचार करने की सिफारिश की है। इसके अलावा परीक्षा शुल्क की समीक्षा, परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं में सुधार और अभ्यर्थियों को उनके रिकॉर्ड किए गए उत्तर देखने की सुविधा देने पर भी विचार करने को कहा गया है। हालांकि, रिकॉर्ड किए गए उत्तर उपलब्ध कराने के मामले में तकनीकी और कानूनी सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

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