Explained NTA is planning to change NEET UG Exam Pattern: नीट यूजी परीक्षा में कुछ बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी चल रही है। इस तैयारी में नीट पेपर को ऑनलाइन कराने से लेकर नीट यूजी क्वेश्चन पेपर तक में बदलाव की बात हो रही है। एक बार प्लानिंग पूरी होने के बाद संभव है कि आम लोगों से राय मांगी जाएगी। इसके लिए बकायदा शिक्षा मंत्रालय फीडबैक प्रक्रिया शुरू करेगा, ताकि ये जाना जा सके कि क्या छात्रों को कुछ बदलाव चाहिए? या अगर बदलाव किए जाएं, तो इससे वे सहज होंंगे अथवा नहींं। हाल फिलहाल में नीट पीजी को लेकर कुछ मामला गर्माया हुआ है, जिसके बाद नीट यूजी में भी सावधानी बरतने की जरूरत समझी जा रही है। जानें किस तरह के हो सकते हैं बदलाव, इससे छात्रों व एजेंसी को क्या होगा फायदा
क्यों जरूरत लग रही बदलाव की?
इसे समझने के लिए नीट पीजी परीक्षा से जुड़े एक विवाद पर बात करते हैं। NEET PG 2025 Counselling का शेड्यूल 12 सितंबर को आ जाना चाहिए था, लेकिन नहीं आया। इसका कारण था 'आंसर की में ट्रांसपरेंसी न होना', जिस वजह से ये विवाद इतना बढ़ गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। यहां याचिका दायर की गई है कि नीट पीजी परीक्षा की आंसर की में स्पष्टता या ट्रांसपरेंसी नहीं है। अब जल्द ही संभवत: 23 सितंबर को इस पर सुनवाई होगी। इसके बाद NEET PG 2025 Counselling का शेड्यूल जारी किया जाएगा।
गौरतलब है कि इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए नीट यूजी में कुछ बदलाव किए जाएंगे। जैसे ही रोडमैप तैयार किया जाएगा, उस बारे में वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी।
नीट परीक्षा ही क्यों?
नीट यूजी पीजी परीक्षा न केवल देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है, बल्कि कठिन परीक्षा भी है। इसके लिए लाखों युवा तैयारी करते और इसमें शामिल होते हैं। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े सारे प्रोसेस को आसान बनाने से सभी को फायदा होगा, खासतौर पर छात्रों को जो इसमें भाग लेते हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) सुधारों के रोडमैप पर काम कर रही है। पिछले कुछ समय से नीट को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं। इसी को देखते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सुधारों की शुरुआत को महसूस किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, कुछ भी अथॉरिटी की ओर से थोपा नहीं जाएगा। खाका तैयार होने के बाद छात्रों, शिक्षकों, अभिवाहकों और विशेषज्ञों से भी राय ली जाएगी।
परीक्षा का वर्तमान पैटर्न क्या है?
इस मेडिकल एग्जाम को अभी पेन एंड पेपर मोड में आयोजित किया जाता है। अगर इसमें बदलाव किया गया तो इसे कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में शिफ्ट किया जा सकता है। सीबीटी मोड परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित परीक्षा कहते हैं, जिसमें अभ्यर्थी पेन-एंड-पेपर प्रारूप की जगह, कंप्यूटर का इस्तेमाल करेंगे। कंप्यूटर में ही सवाल आएंगे, कंप्यूटर में ही जवाब देना होगा। अभ्यर्थी को एक निर्धारित समय पर लॉग करना होगा। स्क्रीन पर एक फिक्स समय के बाद सवाल दिखाई देंगे और क्लिक करके उत्तर देना होगा।
इससे क्या होगा फायदा
- पेपर लीक न होना
- छात्रों को उत्तर संपादित करने की सुविधा
- संगठनों के लिए रीयल-टाइम विश्लेषण
लाखों छात्र को अटेंडेंस में फायदा
अभी नीट यूजी में 20 से 25 लाख छात्र हर साल हिस्सा लेते हैं, बढ़ती प्रतियोगिता को देखकर कहा जा सकता है कि आने वाले समय में इससे ज्यादा कैंडिडेट्स आवेदन करेंगे।अभी अटेंडेंस का हाल ये है कि 100 प्रतिशत छात्र किन्हीं कारणों से परीक्षा नहीं दे पाते हैं, जबकि एनटीए द्वारा नई प्लानिंग शुरू करने के बाद संभव है कि सभी छात्रों को परीक्षा देने का मौका मिले। ऐसे में या पाली में परीक्षा होगी या अन्य दिन पर भी अवसर दिया जा सकता है।
NTA की ओर से नीट परीक्षा में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (Aadhaar-based authentication and biometric verification) को भी पूरी तरह से लागू करने की तैयारी है। यही नहीं, रियल-टाइम वीडियो की निगरानी की जाएगी, सुरक्षित केंद्रों का विस्तार भी किया जाएगा।
नीट परीक्षा ऑनलाइन मोड में होने से प्रश्नपत्रों की छपाई का खर्चा बचेगा, परिवहन का झंझट कम होगा इसके अलावा स्टोरेज करना या स्टोरेज की सुरक्षा में चूक होने का खतरा भी कम होगा। एक जानकारी के अनुसार, नीट अकेली ऐसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा है जो अभी भी पेन एंड पेपर मोड में हो रही है।
छात्रों का नजरिया
ऑनलाइन प्रारूप में बदलाव के फैसले पर छात्रों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षाएं इस प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक बना सकती हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इससे अनावश्यक बाधाएं पैदा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, ग्रामीण पृष्ठभूमि का एक छात्र नजदीकी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र की उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त कर सकता है, जबकि एक शहरी छात्र परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम और इंटरनेट की विश्वसनीयता को लेकर चिंतित हो सकता है। कोचिंग संस्थान, जो NEET की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, भी अपनी राय में बंटे हुए हैं। कई संस्थान पहले से ही डिजिटल संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन कुछ का कहना है कि उनके छात्रों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ऑफलाइन अध्ययन सामग्री और परीक्षाएं पसंद करता है।
नीट यूजी परीक्षा क्या है? कौन दे सकता है?
NEET UG का पूरा नाम है National Eligibility-cum-Entrance Test (Undergraduate)। यह भारत में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में MBBS, BDS, BAMS, BHMS, BUMS, और अन्य मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश पाने के लिए आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन National Testing Agency (NTA) द्वारा किया जाता है। इसमें भाग लेने के लिए अभ्यर्थी को 12वीं कक्षा (Physics, Chemistry, Biology से) पास होना चाहिए और न्यूनतम आयु 17 वर्ष (परीक्षा वर्ष के 31 दिसंबर तक) होनी चाहिए।
परीक्षा के बारे में
अभी इस परीक्षा में पूछे जाने वाले सवाल MCQ (Objective Type) होते हैं, इसमें कुल प्रश्नों की संख्या 200 (जिनमें से 180 हल करने होते हैं) होती है, और पूरा पेपर 720 अंकों का होता है, इसमें विषय: Physics, Chemistry और Biology (Botany + Zoology) होते हैं, प्रत्येक सही उत्तर पर +4 अंक और गलत उत्तर पर -1 अंक मिलता है।
13 भाषाओं में हो रही है परीक्षा
- भाषाएं – NEET UG परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित होती है, जिनमें हिंदी और अंग्रेजी भी शामिल हैं।
- उद्देश्य – देशभर में मेडिकल शिक्षा को एकसमान और पारदर्शी बनाने के लिए NEET को अनिवार्य किया गया है।
कौन लेगा फैसला, कितना चुनौतीपूर्ण होगा नीट में बदलाव
नीट पर कोई भी फैसला शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी NTA अकेले नहीं ले सकते हैं। इस परीक्षा को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी भी लगेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय देश में मेडिकल एडमिशन की प्रक्रिया देखता है और एनटीए ये मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम को आयोजित करता है।
इस संबंध में एनटीए के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार है, और उम्मीद है कि यह एक निष्पक्ष और कुशल परीक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हुए छात्रों के हितों को प्राथमिकता देगा।
