केंद्र ने परीक्षा सुधारों पर काम कर रही नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। 25 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की थी। जुलाई में गठित इस टास्क फोर्स को छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं से 50,000 से अधिक सुझाव मिले हैं।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली परीक्षा सुधार समिति का कार्यकाल बढ़ा
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में संबंधित पक्षों से बातचीत की जा रही है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर समिति के अब तक के काम और प्रगति की जानकारी दी है। अब समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए जनवरी 2027 तक का समय दिया गया है।
समिति ने इस मामले में इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से भी सलाह ली है। उन्होंने 2024 में NEET पेपर लीक की घटना के बाद केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई समिति की अध्यक्षता की थी। जून 2024 में गठित इस समिति ने उसी साल अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट और सुझाव सरकार को सौंप दिए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने इन सुझावों को लागू करने और उनकी निगरानी के लिए हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) बनाई। इस समिति की जिम्मेदारी भी के. राधाकृष्णन को ही दी गई थी।
शिक्षा मंत्रालय इन सिफारिशों को लागू करने की दिशा में काम कर रहा था। इसी बीच इस साल नीट परीक्षा का पेपर दोबारा लीक होने की खबर सामने आई, जिससे देशभर में विवाद खड़ा हो गया। इस घटना के बाद छात्रों और अन्य लोगों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए। इसके चलते तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी दबाव बढ़ा और आखिरकार उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
इस टास्क फोर्स में ये सदस्य
प्रधान के इस्तीफे के अगले दिन, मोदी ने परीक्षा प्रणाली को 'लीक-प्रूफ' (पेपर लीक से सुरक्षित) बनाने के लिए सुधारों का सुझाव देने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। नीलेकणि के अलावा इस टास्क फोर्स के अन्य सदस्यों में ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, IIT चेन्नई के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीना शामिल हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: यूपीपीएससी RO, ARO परीक्षा कितने मार्क्स की होगी
सीबीटी मोड में होगी परीक्षा
पेपर लीक होने के बाद, केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगले साल से NEET का आयोजन कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में किया जाएगा। साथ ही राधाकृष्णन समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा को चरणों में आयोजित किया जाना चाहिए और पूरी तरह से पेन-एंड-पेपर परीक्षा पर निर्भर रहने के बजाय कंप्यूटर आधारित या हाइब्रिड मोड को अपनाया जाना चाहिए।
इनपुट - पीटीआई
