CBSE Re- Checking : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board Secondary Education (CBSE) का 10वीं और 12वीं का रिजल्ट इस बार अन्य सालों के मुकाबले कम अच्छा रहा। ऐसे में रीचेकिंग और रीइवैल्युएशन फीस को लेकर छात्रों में गुस्सा सोशल मीडिया पर साफ देखने को मिल रहा है। कई छात्रों ने दावा किया है कि उनके नंबर उम्मीद से काफी कम आए हैं लेकिन खराब आर्थिक स्थिति के चलते उनके लिए दोबारा कॉपी चेक कराने की फीस भर पाना आसान नहीं है। इस बीच कई छात्र सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठा भी रहे हैं। एक छात्र ने कहा कि उसके पास कॉपी चेक कराने के लिए पैसे नहीं हैं। बस फिर क्या था, देखते ही देखते सोशल मीडिया पर #Freerechecking और #CBSEReevaluation जैसे हैशटेग ट्रेंड करने लगे।
CBSE Rechecking
बताते चलें कि सीबीएसई ने 2026 बोर्ड रिजल्ट के बाद री-इवैल्युएशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड के नियमों के मुताबिक छात्रों को पहले आंसर शीट की फोटोकॉपी लेनी है और फिर वेरिफिकेशन और उसके बाद री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन करना पड़ता है। इसके लिए अलग-अलग फीस भी तय की गई है।
छात्रों और अभिभावकों ने खड़े किए सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आंसर शीट की स्कैन कॉपी के लिए 500 से लेकर 700 रुपये तक फीस देनी पड़ती है, जबकि री-इवैल्युएशन के लिए हर सवाल पर 100 रुपये और वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये हर सब्जेक्ट की फीस तय की गई है। अब इस फीस को लेकर छात्र और अभिभावक दोनों ही सवाल खड़े कर रहे हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अगर कॉपी जांचने में गलती बोर्ड या फिर एग्जामिनर की है, तो उसका आर्थिक बोझ छात्रों पर क्यों डाला जा रहा है। कुछ यूजर्स ने तो ये भी मांग की है कि छात्रों के नंबर रीचेकिंग के बाद बढ़ते हैं तो उन्हें फीस वापस की जाए। वहीं कई लोगों ने तो इस पूरे ही प्रोसेस को गरीब बच्चों के लिए अन्यायपूर्ण बताया है।
Rechecking
RTI में खुली सीबीएसई की पोल
हाल ही में एक रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें पता चला कि सीबीएसई 2024-25 के सेशन में दसवीं और 12वीं में उत्तरपुस्तिका के फोटोस्टेट और रीचेकिंग के नाम पर करीब 23 करोड़ रुपये इकट्ठे किये। शिक्षाविद केशव अग्रवाल द्वारा ये आरटीआई फाइल की गई थी। इस जानकारी में पता चला कि 2024-25 में आंसरशीट की फोटोस्टेट देने के लिए सीबीएसई को 3 करोड़ 9 लाख रुपये मिले। वहीं दोनों क्लास के रीचेकिंग के नाम पर करीब 20 करोड़ 9 लाख रुपये जमा हुए।
'क्यों ली जा रही है फीस ? '
वहीं पिछले साल कुल 23 करोड़ रुपये सीबीएसई को इन दोनों से मिले। इस पर केशव अग्रवाल ने सवाल भी खड़ा किया और कहा कि ये जानकारी काफी चौंकाने वाली है। कई बार देखा गया है कि री इवैल्युएशन करने पर छात्रों के नंबर्स असल में बढ़ जाते हैं तो क्या सीबीएसई के परीक्षकों की गलतियों की सजा अभिभावकों को इस फीस के तौर पर भुगतनी चाहिए, अगर ये भी न मानें तो आखिर ये फीस क्यों ली जा रही है?
उन्होंने कहा कि फोटोकॉपी के लिए 500 रुपये की फीस वसूली जाती है और हर सवाल पर 100 रुपये वसूले जाते हैं। ऐसे में अगर रीचेकिंग के बाद नंबर्स में बढ़ोतरी होती है तो सीबीएसई के परीक्षकों की तरफ से ये गलती का संकेत है और इसलिये CBSE को छात्रों को ये पैसा वापस कर देना चाहिए।
