केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 6 में तीसरी भाषा (R3) लागू करने को लेकर स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 सत्र से यह व्यवस्था अनिवार्य होगी और सभी संबद्ध स्कूलों को 31 मई तक अपनी तीसरी भाषा का चयन अंतिम रूप देकर OASIS पोर्टल पर अपडेट करना होगा। CBSE के अनुसार कई स्कूलों ने इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, लेकिन कुछ अभी भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं या गलत तरीके से भाषा विकल्प भर रहे हैं, जिस पर बोर्ड ने नाराजगी जताई है।
क्लास 6 में तीसरी भाषा लागू करने को लेकर CBSE सख्त
इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। CBSE का मानना है कि इससे छात्रों की भाषाई समझ, संचार कौशल और सांस्कृतिक जागरूकता मजबूत होगी। साथ ही, यह भी तय किया गया है कि कक्षा 6 में चुनी गई तीसरी भाषा ही आगे कक्षा 9 और 10 में विकल्प के रूप में जारी रहेगी, इसलिए स्कूलों को सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।
CBSE ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल निर्धारित समय सीमा तक अनुपालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। यह निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF 2023) के तहत लागू किए जा रहे तीन-भाषा फॉर्मूले का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी कौशल विकसित करना और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।
CBSE इस नीति को लेकर पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है और चाहता है कि देशभर के सभी स्कूल समय पर इसे लागू करें, ताकि नई शिक्षा नीति के तहत एक समान और प्रभावी शिक्षा प्रणाली सुनिश्चित की जा सके। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि स्कूलों को तीसरी भाषा की पढ़ाई तुरंत शुरू करनी होगी, भले ही आधिकारिक पाठ्यपुस्तकें अभी उपलब्ध न हों। स्कूल स्थानीय या अन्य उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं, जबकि NCERT द्वारा किताबें 1 जुलाई तक उपलब्ध कराने की योजना है।
