Army Act Rules: भारतीय सेना देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करती है। सेना में अनुशासन और कर्तव्य का पालन सख्ती से किया जाता है। ऐसे में इन नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त सजा दी जाती है। लेकिन आर्मी कर्मियों के मिलने वाली सजा किस आधार पर और किन नियमों के उल्लंघन पर दी जाती है, इसके बारे में अधिकांश लोग नहीं जानते हैं। आर्मी में नियमों का उल्लंघन करने पर सजा के प्रावधान अलग है।
Army Act Rules (Photo - AI)
जी हां, आपने सही समझा, जिस प्रकार सामान्य नागरिकों के लिए देश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य नागरिक कानून लागू होते हैं, वैसे ही सैन्य कर्मियों के लिए आर्मी एक्ट, 1950 (Army Act 1950) और आर्मी रूल्स, 1954 (Army Rules 1954) के तहत विशेष व्यवस्था बनाई गई है। यदि कोई सैनिक या अधिकारी सेवा के दौरान नियमों, निर्देशों या सैन्य अनुशासन का उल्लंघन करता है, तो उसे इसी एक्ट के तहत सख्त सजा दी जाती है। अगर आप भी भारतीय सेना (Indian Army) में जाने की तैयारी कर रहे हैं तो आपको इन नियमों के बारे में जानना जरूरी है।
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क्या है आर्मी एक्ट, 1950?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 33 के तहत संसद को यह अधिकार दिया है कि वह सशस्त्र बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को मर्यादित कर सकती है ताकि अनुशासन और उचित कर्तव्य का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसी अधिकार के तहत आर्मी एक्ट, 1950 बनाया गया था। यह कानून भारतीय सेना में कार्यरत सभी अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों और अन्य रैंकों पर लागू होता है। इस एक्ट में सैन्य अपराधों की परिभाषा, उनके लिए दी जाने वाली सजा और न्याय प्रक्रिया यानी कोर्ट मार्शल का पूरा ब्योरा दिया गया है।
आर्मी एक्ट की मुख्य धाराएं और सजा के नियम
आर्मी एक्ट के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के अपराधों और नियमों के उल्लंघन के लिए अलग-अलग धाराएं तय की गई हैं, वह इस प्रकार है -
आर्मी एक्ट की धारा 63
यह सेना में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली धारा है। यदि कोई सैन्यकर्मी ऐसा काम करता है जो सैन्य अनुशासन या अच्छे व्यवहार के खिलाफ है, लेकिन उसके लिए कोई अलग से विशिष्ट धारा नहीं है, तो उस पर धारा 63 लागू होती है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्तगी या 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
कर्तव्य में लापरवाही और आदेशों की अवहेलना
कर्तव्य में लापरवाही और आवेदशों की अवहेलना करने पर धारा 39 और 41 के तहत कार्रवाई की जाती है।
धारा 39 - बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने या छुट्टी से समय पर वापस न आने पर इसके तहत कार्रवाई होती है।
धारा 41 - अपने वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेशों की अवहेलना करने या मना करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
विद्रोह और कायरता
सेना में विद्रोह करना (Mutiny) या युद्ध के मैदान में कायरता दिखाना सबसे गंभीर अपराध माना जाता है।
इसके लिए आर्मी एक्ट के तहत उम्रकैद या मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है।
सैन्य संपत्ति का नुकसान या चोरी
सरकारी या सैन्य संपत्ति की चोरी, धोखाधड़ी या उसे नुकसान पहुंचाने पर भी इसके तहत जेल की सजा दी जाती है।
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कोर्ट मार्शल के प्रकार
आर्मी एक्ट के तहत जब कोई कर्मी नियमों का उल्लंघन करता है, तो नागरिक अदालत के बजाय सैन्य अदालत यानी कोर्ट मार्शल के जरिए मामले की सुनवाई होती है। यह मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है -
जनरल कोर्ट मार्शल: यह सबसे बड़ी सैन्य अदालत होती है, जिसमें अधिकारियों और गंभीर अपराधों (जैसे हत्या, देशद्रोह या बड़े वित्तीय घोटालों) की सुनवाई की जाती है। इसमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है।
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल: यह जेसीओ और अन्य रैंकों के मध्यम स्तर के अपराधों के लिए होता है। इसमें अधिकतम 2 साल तक की सजा दी जा सकती है।
समरी जनरल कोर्ट मार्शल: यह युद्ध के समय या फील्ड एरिया में तुरंत न्याय के लिए आयोजित किया जाता है।
समरी कोर्ट मार्शल: इसे यूनिट का कमांडिंग ऑफिसर (CO) आयोजित करता है। इसमें केवल जवानों/एनसीओ के छोटे-मोटे अपराधों की सुनवाई होती है।
आर्मी एक्ट के तहत दी जाने वाली सजाएं
आर्मी एक्ट की धारा 71 के तहत अपराध की गंभीरता के आधार दी जाती है सजा। इसमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास, सेना से बर्खास्तगी, विभिन्न अवधि की जेल, रैंक में अवनति, वरिष्ठता या पे-स्केल में कटौती, कड़ी चेतावनी या फाइन शामिल है।
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भारतीय सेना में कानून और अनुशासन की यह सख्त व्यवस्था ही इसे दुनिया की सबसे अनुशासित और मजबूत सेनाओं में से एक बनाती है। नियम तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति पर बिना किसी पक्षपात के आर्मी एक्ट के तहत तुरंत और कड़ा एक्शन लिया जाता है। आर्मी में जाने की तैयारी करने वाले हर छात्र को इन नियमों के बारे में मालूम होना आवश्यक है।
