तमिलनाडु: न्याय की लंबी लड़ाई में 32 साल गुजारे और 54 आरोपियों ने दुनिया को अलविदा भी कह दिया। जी, हां मद्रास हाईकोर्ट (madras high court) ने 18 महिलाओं से दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में 215 सरकारी अधिकारियों को जेल भेजा है. दोषियों को निचली अदालत ने भी यही सजा मुकर्रर की थी। इसके बाद आरोपिययों ने हाईकोर्ट में अपील की. अब हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा है.
मद्रास हाईकोर्ट ने 18 महिलाओं से दुष्कर्म मामले में 215 सरकारी अधिकारियों को भेजा जेल
दरअसल, इन सभी अधिकारियों पर 18 वनवासी महिलाओं से बलात्कार करने का आरोप है. महिलाओं ने न्याय की आस में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबी लड़ाई के बाद मामले में कोर्ट ने सभी दोषियों से 10 लाख रुपये मुआवजा चुकाने के लिए कहा है. दुष्कर्म के दोषियों से मुआवजे की 50 फीसदी रकम वसूली जाएगी. सभी दोषियों को 1 से 10 साल तक की सजा सुना कर सलाखों के पीछे भेजा गया है.
वीरप्पन को पकड़ने गए थे 269 अधिकारी
बता दें कि ये घटना 20 जून 1992 को घटी थी। उस दौरान दक्षिण में वीरप्पन (virappan) चन्दन तस्करी के लिए कुख्यात था. तमिलनाडु के वन और राजस्व विभाग को सूचना मिली की धर्मपुरी जिले के वाचथी गांव में चंदन की कटाई और तस्करी धड़ल्ले से की जाा रही है. लिहाजा अधिकारियों ने वहां छापेमारी कार्रवाई की. आरोप था कि इसी दौरान जांच को गए अधिकारियों ने 18 वनवासी महिलाओं से बारी-बारी रेप किया. इतना ही नहीं उन्होंने कई लोगों के घर उजाड़े और उनके मवेशियों को मार डाला.
54 आरोपियों की मौत हो गई
वाचथी गांव में छापेमारी के लिए 155 वनकर्मी, 108 पुलिसकर्मी और 6 राजस्व अधिकारी पहुंचे थे. कुल 269 सरकारी कर्मचारी इस छापेमारी का हिस्सा रहे. लेकिन, 1992 से लेकर 2023 तक 54 आरोपियों की मौत हो गई. करीब 32 साल बाद उन सभी वनवासी महिलाओं को इन्साफ मिल है।
