गोवा पुलिस ने कहा कि गोवा में गरीब परिवारों की "अच्छी दिखने वाली लड़कियों" यानी सुंदर लड़कियां को अंतरराज्यीय रैकेट के तहत देश भर में बलात्कार के मामले दर्ज कराने के लिए पैसे का लालच दिया जाता है। पुलिस ने जांच में चौथी गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा किया। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन की निगरानी करने वाले डिप्टी इंस्पेक्टर (DIG) असलम खान ने कहा, हमने पाया है कि यह एक बड़ा अंतरराज्यीय रैकेट है।
गोवा में सुंदर लड़कियां फर्जी केस के जरिये करती हैं वसूली (प्रतीकात्मक तस्वीर-unsplash)
पुलिस अधिकारी ने कहा कि रैकेट में अच्छी दिखने वाली लड़कियों की पहचान करना और उन्हें झूठे बलात्कार के मामले दर्ज करने के लिए पैसे की पेशकश करना शामिल है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने उनके हवाले से लिखा कि जब लड़कियों को पता चलता है कि पैसा कमाने का यह आसान तरीका है तो वे रैकेट नहीं छोड़तीं। यह एक दुष्चक्र है; एक बार जब वे अंदर आ गईं तो वे बाहर नहीं जा सकतीं।
जांच तब शुरू की गई जब गोवा पुलिस ने गुजरात की दो महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे एक अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया। जो फर्जी बलात्कार के मामलों की धमकी देकर पैसे वसूलती थीं। कथित तौर पर महिलाएं एस्कॉर्ट सेवाएं प्रदान करने के बहाने ग्राहकों से संपर्क करती थीं और भुगतान न करने पर बलात्कार के साथ फिर उन्हें धमकी देती थीं। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक वे कुछ लोगों के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज कराने में भी कामयाब रहे।
इस कार्यप्रणाली में महिलाएं संभावित ग्राहकों के साथ ऑनलाइन संपर्क स्थापित करती हैं। उनके साथ गोवा की यात्रा करने और ग्राहकों के होटल के कमरों में रुकने की कोशिश करती थीं। अगले दिन महिलाएं ग्राहकों को बड़ी रकम नहीं देने पर बलात्कार का मामला दर्ज कराने की धमकी देती थीं। जिन लोगों ने ऐसा नहीं किया उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस हिरासत में ले ली गई।
अब तक गोवा में दो और गुजरात में एक रेप का मामला दर्ज किया गया है। हाल ही में असोनोरा के एक रिसॉर्ट में 23 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में गुजरात के एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिसके कारण उसकी गिरफ्तारी हुई। वह शख्स कथित तौर पर गोवा की फ्लाइट में महिला के संपर्क में आया। एक अन्य मामले में एक महिला जो महाराष्ट्र के एक व्यवसायी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराने के लिए कैलंगुट पुलिस स्टेशन पहुंची थी। उसने आरोपी के साथ बातचीत के बाद शिकायत दर्ज नहीं करने का फैसला किया।
