इंदौर में एक शख्स ने दुष्कर्म में नाकाम होने पर 7 साल की मासूम की हत्या कर दी थी, पीड़िता पर 29 बार चाकू से वार किया था अब इस मामले में कोर्ट ने आरोपी सद्दाम को 'फांसी' की सजा सुनाई है, ये घटना 23 सितंबर को सामने आई थी, जिस मामले पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है, अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी का अपराध माना है।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा-आरोपी बर्बर मानसिकता और पाशविक प्रवृत्ति से ग्रसित, ऐसे व्यक्ति को जीवन जीने का अधिकार नहीं है। गौर हो कि इन्दौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र में करीब 4 महीने पहले एक बच्ची को दुष्कर्म की नीयत से आरोपी उठाकर ले गया था। आरोपी को बच्ची को उठाते हुए रहवासियों ने देख लिया।
सद्दाम ने 7 साल की मासूम बच्ची को 29 बार चाकू मारे
रहवासियों ने जिस घर में वह बच्ची को उठाकर लेकर गया, उस घर के बाहर जाकर जनकर हंगामा कर दिया। पुलिस को भी पूरे मामले की सूचना दी गई , घर के बाहर हंगामा होते देख आरोपी सद्दाम ने 7 साल की मासूम बच्ची को 29 बार चाकू मार के मौत के घाट उतार दिया था, कोर्ट ने आरोपी को दण्डित करते हुए फांसी की सजा दी है।
सद्दाम को सख्त सजा से दण्डित करते हुए फांसी की सजा सुनाई है
पूरा मामला पिछले साल 23 सितंबर को हुआ और ये केस इंदौर के आजाद नगर क्षेत्र का है, केस में पुलिस ने सारे सबूत कोर्ट के समक्ष रखे और कोर्ट से दर्खवास्त की कि इसकी सुनवाई जल्द से जल्द हो ताकि पीड़ित परिवार को जल्दी न्याय मिल सके, कोर्ट ने आरोपी सद्दाम को सख्त सजा से दण्डित करते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
पुलिस ने आरोपी के उपर धारा 302 , 364 ,363 और पॉक्सो एक्ट के तहत करवाई की थी। न्यायाधीश सुरेखा मिश्रा की कोर्ट ने फैसला सुनाया है, अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव और सुशीला राठौर ने केस में पैरवी की थी। इस पूरे मामले में थाना प्रभारी इन्द्रेश त्रिपाठी और स्व. इस्पेक्टर अनिल गौतम की विवेचना को महत्त्वपूर्ण बताते हुए आरोपी को सख्त सजा से दण्डित किया गया।
घटना के साढ़े तीन महीने में ही कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई कर फैसला सुना दिया
मामले में आरोपी के सीसीटीवी फुटेज, फिंगर प्रिंट के साथ ही डीएनए रिपोर्ट से हत्याकांड ने सद्दाम के शामिल होने की पुष्टि हुई। सब साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को फांसी की सज़ा से दण्डित किया गया है। काफी तेज फैसला कोर्ट के द्वारा दिया गया है, घटना के साढ़े तीन महीने में ही कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई कर फैसला सुना दिया, जो अभी तक का रिकॉर्ड तेज फैसला है।
