Yuvraj Singh Manchanda Death Case: दिल्ली के 31 वर्षीय रियल एस्टेट पेशेवर युवराज सिंह मंडाहा की मौत के मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। युवराज की बहन, जो दिल्ली में दर्ज एफआईआर की मुख्य शिकायतकर्ता भी हैं, की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को आदेश दिया है कि वे बादशाहपुर इलाके से मिले एक अज्ञात शव की बरामदगी, पहचान, फॉरेंसिक जांच और दाह संस्कार से जुड़े तमाम रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करें। बाद में इस शव की पहचान युवराज के रूप में हुई थी।
कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस से मांगे सारे सबूत और रिकॉर्ड
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत दाखिल की गई इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ किया कि 22 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे तक सारा रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसके बाद इन सभी सबूतों को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी (IO) को सौंप दिया जाएगा। युवराज की बहन ने लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था।
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अदालत ने मांगे ये सारे सबूत
वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद और उनकी टीम के माध्यम से दाखिल अर्जी में मांग की गई थी कि बादशाहपुर पुलिस के पास मौजूद तमाम पुलिस डायरी प्रविष्टियों (GD/DD), पीसीआर कॉल रिकॉर्ड, क्राइम सीन के नक्शे, फोटो और वीडियो को सुरक्षित रखा जाए। इसके अलावा, अदालत ने इनक्वेस्ट कार्यवाही, अस्पताल और मॉर्च्युरी के दस्तावेज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, विसरा तथा डीएनए सैंपल के रिकॉर्ड की मूल फाइलें मांगी हैं।
साकेत कोर्ट ने विशेष रूप से 'जिपनेट' (ZIPNET) रिकॉर्ड भी तलब किए हैं, ताकि यह जांचा जा सके कि शव की पहचान स्थापित करने के लिए गुरुग्राम पुलिस ने कौन-कौन से कदम उठाए थे और डेटा कब और कैसे अपलोड किया गया था। इस आदेश के बाद अब युवराज सिंह मंडाहा की मौत से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
