हाय रे गरीबी : खेती का साथी छिना तो खुद बने बैल, 'बूढ़े कंधे' और बेबसी ने खींचा हल

महाराष्ट्र के लातूर में आकाशीय बिजली की चपेट में आकर अपना बैल को खोने वाले एक बेबस किसान दंपति के पास जब नया बैल खरीदने के पैसे नहीं बचे, तो उन्होंने खुद को ही दांव पर लगा दिया। आज वो बेबस पति-पत्नी कंधे से कंधा मिलाकर, बैलों की जगह खुद हल खींचकर अपनी सूखी जमीन जोतने को मजबूर हैं।

सूखा खेत...आसमान से बरसती आग...लू के थपड़े और तापमान 40 डिग्री पार...दो बूढ़े जना हैं, एक बैल है और 'म्हातारी' अपने कंधे पर हल और जुए का बोझ उठा रही है... ऐसी तस्वीरें शायद कम ही देखने को मिलती हैं, लेकिन जिसने भी इस लाचारी को देखा आंखों पर यकीन न कर सका। लेकिन ये हकीकत है कोई अफसाना नहीं। मराठवाड़ा रीजन के लातूर शहर से महज कुछ ही दूरी से आई इस तस्वीर ने महाराष्ट्र सरकार के किसानों के लिए किए जा रहे तमाम दावों पर एक तमाचा है।

दरअसल, जिस बैल के सहारे किसान अपने खेतों में हर साल उम्मीदों की फसल बोता था, उसकी अचानक मौत ने कमर तोड़ दी। महाराष्ट्र के लातूर जिले में आकाशीय बिजली ने किसान काशीनाथ पुंडलिक गायकवाड़ से उनकी खेती का सबसे बड़ा सहारा छीन लिया। आर्थिक तंगी ऐसी है कि नया बैल खरीदना तो दूर सोचना भी उनके बस में नहीं। मानसून की दस्तक के बीच जब खेतों में जुताई-बुवाई की तेजी तैयारियां करनी चाहिए, वहां लाचार किसान और उनकी बूढ़ी संगिनी खुद बैलों की जगह खेत को पसीने से सींच रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि उस लाचारी की तस्वीर है, जहां प्राकृतिक आपदा के बाद गरीब किसान के सामने रोजी-रोटी और खेती बचाने का संकट खड़ा हो जाता है।

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