Varanasi Train Route Divert: इस महाशिवरात्रि पर शनिवार को श्रद्धालु वाराणसी मुख्य शहर एवं इसके आसपास के मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सकते हैं। शहर के रविंदपुरी में बनखंडी महादेव का मंदिर है। यह अति प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर शिवलिंग की आकृति का है। मंदिर की ऊंचाई 60 फीट और व्यास 30 फीट है। इस मंदिर की शैली अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग है। 1818 में बनखंडी महाराज ने मंदिर बनवाया था। ऊंचाई से देखने पर शिवलिंग की सीढ़ियां अरघे आकार की दिखती हैं।
चितईपुर स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर में पूरी होती है मनोकामना
ऐसी मान्यता है कि पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करने पर बनखंडी महादेव हर मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर में भगवान शंकर के अलावा, भगवान गणेश, हनुमान जी और आदिशक्ति की मूर्ति है।
चितईपुर में हैं कर्दमेश्वर महादेव
काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में चितईपुर स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर भी है। यह सामान्य दिनों में भी हर दिन 400-500 श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं। मंदिर का निचला हिस्सा 6-8वीं, दूसरा हिस्सा 8-10वीं और सबसे ऊपर का भाग 10-12वीं शताब्दी में बनाया गया है। गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग है। यह उलटी रखी गई कटोरी की तरह है। दो फीट चौड़ा और आधा फीट ऊंचा शिवलिंग है। एक खास बात है कि यहां शिवलिंग के सामने नहीं, बल्कि मंदिर के बाहर नंदी महाराज हैं। वैष्णव धर्म का प्रभाव मंदिर की मूर्तियों में देखने को मिलता है। मंदिर में विष्णु के वामन अवतार की भी मूर्ति है।
