ज्ञानवापी संस्कृत का एक शब्द है जिसका मतलब है ज्ञान का कुआं। ये नाम है उस मस्जिद का जो सदियों से विवादों के केंद्र में है। वहीं 1991 से इस मस्जिद को हटाकर मंदिर बनाने की लड़ाई चल रही है। आखिर काशी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद जहां नमाज पढ़ा जाता है, उसका नामकरण संस्कृत के शब्द पर क्यों पड़ा ? ये कहां है और ये क्यों विवादों में है?
ज्ञानवापी मस्जित
आपको बता दें कि ज्ञानवापी संस्कृत नाम होने की वजह से ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कई दावे किए गए हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ज्ञानवापी मस्जिद का क्या इतिहास है और इसके नाम का क्या मतलब है। साथ ही हम जानेंगे कि यह कहां पर बना है।
क्या है ज्ञानवापी का मतलब ?
जानकारों के अनुसार मस्जिद और विश्वनाथ मंदिर के बीच 10 फीट का गहरा कुआं बना हुआ है। ज्ञानवापी की बात करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है, ज्ञान और वापी। ज्ञान का मतलब तो सभी जानते हैं, वहीं वापी का मतलब होता है कुंआ। यानी की ज्ञान का कुआं। स्कंद पुराण ऐसा वर्णित है कि भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से इस कुंएं का निर्माण किया था। ज्ञानवापी का जल भगवान विश्वनाथ को चढ़ाया जाता है। वहीं ये दावा किया जाता है कि इस मस्जिद के अंदर ही वो तालाब है। यही वजह है कि इसे ज्ञानवापी कहते हैं।
किसने बनवाया था मंदिर ?
ऐसा माना जाता है कि चौथी और पांचवीं शताब्दी के दौरान चंद्रगुप्त द्वितीय ने काशी विश्वनाथ मंदिर बनवाया था। जिसके बाद मोहम्मद गोरी के आदेश से मंदिर के ज्यादातर हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया। इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने ज्ञानवापी मस्जिद के पास वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया था।
कहां है ज्ञानवापी मस्जित ?
ज्ञानवापी मस्जित जिसे आलमगीर मस्जित भी कहा जाता था वह वाराणसी में स्थित है। जो काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा हुआ है। जानकारों के अनुसार इस मस्जित का निर्माण औरंगजेब ने 1669 में करवाया था।
