Ghaziabad Pink Police Booth Death: क्या हमारा समाज पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुका है? क्या खाकी वर्दी का फर्ज सिर्फ नियमों की दुहाई देना है, किसी मरते हुए इंसान की जान बचाना नहीं? ये बेहद तीखे और परेशान करने वाले सवाल दिल्ली से सटे हाईटेक शहर गाजियाबाद से आई एक दिल दहला देने वाली तस्वीर के बाद उठ रहे हैं।
गाजियाबाद: वो 30 खौफनाक मिनट जिसने छीन ली युवक की जिंदगी! महिला पुलिस बूथ के बाहर खून से लथपथ तड़पता रहा शख्स, तमाशबीन बनी रही पुलिस
गाजियाबाद के सेक्टर-23, मधुबन बापूधाम स्थित महिला पिंक पुलिस बूथ (Women Pink Police Booth) के ठीक सामने रविवार की दोपहर जो कुछ भी हुआ, उसने पुलिस के 'मित्र पुलिस' होने के दावों और तथाकथित सभ्य समाज के मानवीय चेहरे की कलई खोलकर रख दी है। एक युवक सड़क पर 30 मिनट तक खून से लथपथ हालत में तड़पता रहा, लेकिन सामने खड़ी भीड़ मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त रही और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। अस्पताल पहुंचने में हुई इसी देरी के कारण युवक ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
विवाद से लेकर मौत तक
मृतक युवक की पहचान राजकुमार के रूप में हुई है। चश्मदीदों और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से इस दर्दनाक घटनाक्रम की पूरी कड़वी सच्चाई सामने आई है।
रविवार दोपहर राजकुमार का एक ऑटो चालक के साथ किराए को लेकर विवाद हो गया था। विवाद के बाद मामला सुलझाने के लिए एक ऑटो सीधे महिला पिंक पुलिस बूथ के अंदर दाखिल होता है, जिसमें राजकुमार और कुछ अन्य लोग सवार थे।
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, राजकुमार कथित तौर पर नशे की हालत में था और एक शख्स उसे पकड़कर बूथ से बाहर ले जाता है। इसके बाद बाहर फिर से विवाद बढ़ जाता है।
राजकुमार मदद मांगने के लिए दोबारा महिला पिंक पुलिस बूथ का दरवाजा खटखटाता है। लेकिन अंदर मौजूद महिला पुलिसकर्मी उसे यह कहकर बाहर ही रोक देती हैं कि यह महिला बूथ है, यहां उसकी शिकायत दर्ज नहीं होगी और उसे पुरुष पुलिस चौकी जाना चाहिए।
जब पुलिस बूथ का दरवाजा नहीं खुला, तो हताश राजकुमार ने दरवाजे के शीशे पर जोर से धक्का मारा। धक्का लगते ही कांच का भारी दरवाजा टूट गया और कांच का एक बड़ा नुकीला टुकड़ा राजकुमार के हाथ की नस को काटता हुआ पार हो गया।
लोग वीडियो बनाते रहे, पुलिस खड़ी रही
कांच लगने के बाद राजकुमार के हाथ से फव्वारे की तरह खून बहने लगा और वह दर्द से चीखते हुए पुलिस बूथ के ठीक बाहर सड़क पर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, राजकुमार सड़क पर पड़ा तड़प रहा था, लेकिन वहां मौजूद दर्जनों लोग तमाशबीन बने रहे। कुछ लोग अपनी गाड़ियों से उतरकर तमाशा देखने लगे तो कई लोग अपने मोबाइल निकालकर तड़पते हुए युवक का वीडियो बनाने लगे।
इस दौरान बूथ के अंदर से महिला पुलिसकर्मी भी बाहर आ गईं, लेकिन उन्होंने प्राथमिक उपचार देने या घायल युवक को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई।
काफी देर बाद पास के ही एक दुकानदार और पुलिस बूथ द्वारा कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। सूचना के करीब 30 मिनट बाद एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ी मौके पर पहुंची। राजकुमार को तुरंत संजय नगर जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसके शरीर का अधिकांश खून बह चुका था और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
क्या सिर्फ लीपापोती करेगी पुलिस?
इस घटना के बाद गाजियाबाद पुलिस का आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसमें पुलिस ने राजकुमार के नशे में होने और कांच का गेट खुद तोड़ने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। लेकिन इस दलील के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
फर्ज से ऊपर नियम क्यों? जब राजकुमार मदद की गुहार लगा रहा था, तो महिला पुलिसकर्मियों ने उसे पुरुष चौकी भेजने के बजाय अपने स्तर पर पास की चौकी या पीआरवी (PRV) को तुरंत फोन क्यों नहीं किया?
इतना ही नहीं किसी भी हादसे के बाद शुरुआती 30 मिनट सबसे कीमती होते हैं। जब राजकुमार सड़क पर खून से लथपथ तड़प रहा था, तब पुलिस कर्मियों ने अपनी गाड़ी या किसी ऑटो की मदद से उसे तुरंत अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया? क्या खाकी सिर्फ एम्बुलेंस के आने का इंतजार करने के लिए है?
गाजियाबाद पुलिस के आला अधिकारियों को इस मामले में केवल लीपापोती करने के बजाय ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों की लापरवाही और इस अमानवीय घटना की उच्च स्तरीय जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान इस तरह तमाशा बनते हुए न जाए।
