CM Yogi on Republic Day: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों से प्रेरित होकर एक 'सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण हेतु संकल्पित हों। योगी आदित्यनाथ ने यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद अपने संबोधन में कहा, 'भारत का संविधान व्यक्ति नहीं समष्टि के भाव को जोड़ने की प्रेरणा देता है। यदि कोई व्यक्ति कहता है कि मैं न्याय से ऊपर हूं, संविधान से ऊपर हूं, व्यवस्था से ऊपर हूं तो मुझे लगता है कि वह भारत के संविधान की अवमानना कर रहा है।'
गणतंत्र दिवस के मौके पर क्या बोले सीएम योगी?
संकल्पों को आगे बढ़ाने की नयी प्रेरणा
उन्होंने कहा कि आज का यह दिवस हम सबको भारत के महान संविधान के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने एवं संकल्पों को आगे बढ़ाने की नयी प्रेरणा देता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज ही के दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था। उन्होंने कहा, ‘76 वर्ष की यात्रा में इस संविधान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं... लेकिन 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के अपने संकल्पों के अनुरूप उत्तर से दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, भारत की एकात्मकता और एकता के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए हम सब एक नये भारत का दर्शन कर रहे हैं। इसमें हमारे संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका है।'
योगी ने कहा, ‘भारत के संविधान का असली संरक्षक अगर कोई है तो भारत का नागरिक है। उस नागरिक के प्रति हर एक संस्था को, हर नागरिक को, हर मंत्रालय और विभागों को अपनी जवाबदेही को सुनिश्चित करना होगा। यह संविधान हमारे समर्पण के भाव को भी व्यक्त करता है।'
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी संविधान की मूल भावनाओं का अनादर होता है तो वास्तव में भारत माता के उन सपूतों का, जिनके बल पर यह देश स्वतंत्र हुआ, उनका भी अनादर होता है।
उन्होंने कहा, 'यह अनादर सिर्फ संविधान का ही नहीं, उन महान पुरुषों का भी अपमान है, जिनके बल पर यह देश स्वतंत्र हुआ। इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह संविधान के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण भाव के साथ कार्य करे।'
योगी ने कहा कि यह हमारे लिए एक पवित्र दस्तावेज है जो हर विपरीत परिस्थिति में हमारा मार्गदर्शक होगा। भारत को एकता और अखंडता के सूत्र में बांधने से लेकर देश के अंदर न्याय, ममता और समता के भाव को लागू करने के अभियान को जारी रखना होगा।
संविधान के तीन शब्दों का किया जिक्र
उन्होंने संविधान के तीन शब्दों ‘न्याय, समता और ममता’ का जिक्र करते हुए कहा, 'देश के अंदर जाति, मत, मजहब और भाषा के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव न हो। परस्पर समता और ममता का यह माहौल पूरे देश के अंदर आगे बढ़ेगा तो भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अभियान को कोई रोक नहीं सकता है।'
उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना हर भारतवासी के लिए गौरव का क्षण होना चाहिए, क्योंकि यह क्षण हर नागरिक की खुशहाली और कई गुना समृद्धि का दिन होगा। इसका रास्ता समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति से प्रारंभ होता है।
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले देश को विभाजित करने के लिए कई कुचक्र प्रारंभ हुए, कुछ लोगों ने क्षेत्र के आधार पर, कुछ लोगों ने भाषा, कुछ ने जाति के आधार पर देश को बांटने के लिए षडयंत्र रचे लेकिन वे सफल नहीं हुए।
महात्मा गांधी को याद किया
इस मौके पर उन्होंने महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में स्वाधीनता आंदोलन ने ऊंचाइयां प्राप्त की और वह उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं। योगी ने संविधान सभा के अध्यक्ष व गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, संविधान शिल्पी बाबासाहब भीमराव आंबेडकर, वर्तमान भारत के शिल्पकार बल्लभ भाई पटेल और क्रांतिकारियों के सिरमौर नेताजी सुभाषचंद्र बोस समेत भारत माता के उन महान सपूतों को भी स्मरण किया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया।
उन्होंने स्वतंत्र भारत में देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए बलिदान होने वाले सपूतों को भी याद किया। उन्होंने कहा, 'हर भारतवासी का दायित्व बनता है कि हम अपने संविधान के प्रति पूरी श्रद्धा और समर्पण भाव के साथ काम करें क्योंकि सम-विषम परिस्थितियों में यह भारत का संबल बना है।'
