Usha Temple: भरतपुर में मौजूद है श्री कृष्ण के पौत्र की प्रेम निशानियां, जानिए अनोखा इतिहास

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  • Updated Feb 14, 2024, 07:36 PM IST

भरतपुर का नाम आते ही आपके मन में किले और इमारतों की यादे ताजा हो जाती हैं। यहां कई किले और ऐतिहासिक इमारतें हैं। यहां कई स्वर्ण मंदिर भी हैं। ऐसा ही एक मंदिर भरतपुर के बयाना में है, जो कि उषा और अनिरुद्ध के प्रेम का प्रतीक है। तो आइए जानते हैं मंदिर का इतिहास।

प्रेम के प्रतिक उषा मंदिर को बाणासुर की पुत्री उषा की सहेली चित्रलेखा ने बनवाया था। चित्रलेखा ने इस मंदिर का निर्माण अपनी मित्र उषा में किया था, जोकि भरतपुर के बयाना में भीतरवाड़ी में है। भरतपुर का यह मंदिर काफी भव्य और अनोखा है। इस मंदिर को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। उषा बयाना के परम शिवभक्त बाणासुर की पुत्री थी। महाभारत काल में बयाना श्रोणितपुर के नाम से मशहूर था।

usha temple

भरतपुर, उषा मंदिर

कहा जाता है कि सम्राट बाणासुर की पुत्री उषा परम सुंदरी थी। उषा को श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध से सपनों में प्रेम हो गया था। अनिरूद्ध द्वारका के राजकुमार थे, जिनकी सुन्दरता की तुलना कामदेव से की जाती थी। उसा ने अनिरुद्ध की सुंदरता के बारे में सुन तो रखा तो लेकिन उन्हें कभी देखा नहीं था।

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