उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की घोषणा होते ही राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीख तय करते ही भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों ही दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं, लेकिन इस बीच आए बयानों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।
केशव मौर्य का दावा- सपा के 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में
राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर बड़ा हमला बोलते हुए दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के लगभग 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। उन्होंने सपा के उस दावे का जवाब दिया जिसमें वे बीजेपी को राज्यसभा चुनाव में सरप्राइज़ देने की बात कर रहे थे। मौर्य ने साफ कहा कि विपक्षी दल किसी भ्रम में न रहे, बल्कि बीजेपी उन्हें ऐसा सरप्राइज़ देगी जिसकी उन्होंने उम्मीद भी नहीं की होगी।
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इसके साथ ही केशव मौर्य ने विरोधी दलों के 'इंडिया' गठबंधन को निशाने पर लेते हुए उसे 'भानुमति का कुनबा' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन पूरी तरह बिखर चुका है और इसमें कोई आपसी एकता नहीं है। जब भी विपक्ष चुनाव हारता है तो इसका दोष चुनाव आयोग और ईवीएम (EVM) पर मढ़ देता है, लेकिन जब खुद जीतता है तो इसे अपनी सफलता बताता है। प्रदेश की जनता विपक्षी दलों के इस रवैये का मुंहतोड़ जवाब देगी।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाया है। अखिलेश यादव का कहना है कि बीजेपी सरकार बनने के बाद से ही राज्य में एकतरफा और भेदभावपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे ज्यादा अत्याचार और अन्याय पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक यानी 'पीडीए' वर्ग के लोगों के साथ किया जा रहा है।
राज्यसभा की इन सीटों पर होने वाला मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां बीजेपी अपने मजबूत आंकड़ों और विपक्षी कुनबे में सेंधमारी का दावा कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करके लड़ाई को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश में लगी है।
