UP Gorakhpur News Today: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के राजघाट थाना क्षेत्र स्थित राप्ती नदी किनारे बने गुरु गोरक्षनाथ अंत्येष्टि स्थल पर रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। भारी बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने से श्मशान घाट परिसर का गुंबदनुमा छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया।
गोरक्षनाथ घाट पर हुा हादसा
इस हादसे के वक्त छज्जे के नीचे बैठे दो अधिवक्ताओं की मलबे में दबने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान राप्तीनगर निवासी अधिवक्ता आलोक अस्थाना और शक्तिनगर कॉलोनी निवासी अधिवक्ता संजय सिंह के रूप में हुई है।
अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे अधिवक्ता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 11:30 बजे राप्ती नदी किनारे अपने साथी अधिवक्ता विनोद तिवारी की माता जी का अंतिम संस्कार चल रहा था। इसी में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में अधिवक्ता घाट पर पहुंचे थे। बारिश और खराब मौसम के चलते आलोक अस्थाना और संजय सिंह चबूतरे के ऊपर बने गुंबदनुमा छज्जे के नीचे बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ आकाशीय बिजली गिरी, जिससे कंक्रीट का स्लैब टूटकर सीधे नीचे बैठे वकीलों पर आ गिरा। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई।
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एंबुलेंस में देरी को लेकर अस्पताल में भारी हंगामा
आलोक अस्थाना की मौत की खबर मिलते ही सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता जिला अस्पताल पहुंच गए। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद करीब एक घंटे तक कोई एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। समय पर समुचित चिकित्सीय सुविधा न मिलने के कारण वकीलों की जान गई।
नाराज वकीलों ने एंबुलेंस को घेरकर शव को बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने से रोक दिया और जमकर हंगामा किया। स्थिति बिगड़ती देख जिला अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
CMO, जेई और ठेकेदार पर FIR; मुआवजे की घोषणा
मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतक अधिवक्ता की पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजेश झा और जिला अस्पताल के लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इसके साथ ही गोरखपुर के जिलाधिकारी (DM) दीपक मीणा ने निर्माण कार्य में लापरवाही को लेकर तत्कालीन जूनियर इंजीनियर (JE), असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं। एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम में हुई देरी की जांच के आदेश दिए हैं। दोनों मृतक अधिवक्ताओं के आश्रित परिजनों को 4-4 लाख रुपये की तत्कालीन सहायता राशि प्रदान की है तथा 5-5 लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
