Yamuna Pushta Expressway Project Latest Update: उत्तर प्रदेश सरकार ने यमुना पुश्ता एक्सप्रेसवे नाम के एक नए प्रस्ताव की समीक्षा की है। यह प्रस्तावित एलिवेटेड सड़क करीब 30 किलोमीटर लंबी होगी, जो सेक्टर-150 से कालिंदी कुंज तक जाएगी और आगे चलकर इसी बिंदु पर यमुना एक्सप्रेसवे से भी जुड़ने की योजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नोएडा एक्सप्रेसवे पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से देश के पश्चिमी हिस्सों के बीच यातायात को बेहतर बनाना है, खासकर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर) के माध्यम से संपर्क को मजबूत करने के लिए। प्रस्ताव में यमुना पुश्ता के दोनों ओर बाढ़-रोधी (फ्लड-रेजिलिएंट) संरचनाओं के निर्माण की योजना भी शामिल है। इसके साथ ही, परियोजना के लिए पर्यावरण संरक्षण और संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े व्यापक उपायों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
यूपी सरकार ने यमुना पुश्ता एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की फिर से समीक्षा की (सांकेतिक फोटो: Canva)
यातायात का बढ़ता दबाव
तेजी से हो रहे शहरी विकास और प्रस्तावित जेवर एयरपोर्ट के संचालन के चलते हाल के समय में नोएडा–ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए, यमुना नदी के किनारे बने तटबंध (यमुना पुश्ता रोड) को एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मार्ग के बनने से क्या होगा फायदा?
अगर इस मार्ग का पूर्ण विकास और विस्तार किया जाता है, तो इससे ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी, यात्रा समय में बचत और यातायात की समग्र दक्षता में सुधार होगा। साथ ही, यह सड़क झज्जर, आगरा और एनसीआर के अन्य क्षेत्रों के बीच यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए एक अधिक सुगम और प्रभावी संपर्क मार्ग प्रदान करेगी।
पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ने की संभावना
इसके अलावा, प्रस्तावित कॉरिडोर क्षेत्र में उभर रहे गतिविधि केंद्रों, जैसे सेक्टर 168 और सेक्टर 150, को आपस में जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। इसमें पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के मौजूदा नेटवर्क से जुड़ने की भी संभावना है, जिससे पूरे एनसीआर में कनेक्टिविटी और अधिक बढ़िया होगी। यह बेहतर संपर्क व्यवस्था आगामी हवाई अड्डे के संचालन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास को भी मजबूती देगा।
परियोजना क्यों अटकी हुई है?
यह परियोजना फिलहाल सिंचाई विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी न होने के कारण रुकी हुई है, जो निर्माण कार्य शुरू करने से पहले आवश्यक है। विभिन्न अधिकारियों को चिंता है कि यदि सड़क यमुना के तटबंध के बहुत करीब बनाई जाती है, तो इससे बाढ़ सुरक्षा संरचनाएं कमजोर हो सकती हैं और मौजूदा जल निकासी प्रणाली सही ढंग से काम नहीं कर पाएगी। चूंकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) बिना मंजूरी के निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकती, इसलिए NHAI के पास आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता यह है कि इस कॉरिडोर को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिया जाए। इस प्रस्ताव की समीक्षा संबंधित अधिकारियों द्वारा अभी भी जारी है।
पर्यावरणीय और संरचनात्मक समस्याओं को किया जाए कम
लखनऊ में हुई एक बैठक में अधिकारियों ने परियोजना के कार्यान्वयन के विभिन्न मॉडलों का मूल्यांकन किया। इसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के विकल्प के साथ-साथ राज्य या केंद्र सरकार द्वारा एजेंसी जैसे UPEIDA के जरिए वित्तपोषण (Financing) पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा, अधिकारियों ने उन्नत, बाढ़-रोधी (फ्लड-रेजिलिएंट) डिजाइन का भी मूल्यांकन किया है ताकि पर्यावरणीय और संरचनात्मक समस्याओं को कम किया जा सके। जैसा कि जेवर एयरपोर्ट के संचालन की तैयारी हो रही है, नोएडा से जुड़ी वैकल्पिक एक्सप्रेसवे की आवश्यकता बेहद जरूरी हो गई है। यमुना पुश्ता एक्सप्रेसवे परियोजना को एनसीआर के भीतर व्यापार और यातायात के भविष्य के लिए एक अहम बुनियादी ढांचा परियोजना माना जा रहा है। यह परियोजना वर्तमान सड़क मार्गों पर होने वाले जाम और ट्रैफिक दबाव को कम करने में भी मदद करेगी।
