Noida DM Medha Roopam: नोएडा की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के संबंधित हिस्सों पर रोक लगा दी है, जिसमें नोएडा की डीएम के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणियां की गई थीं और याचिकाकर्ता छात्रा को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने तथा यह राशि डीएम की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया गया था।
नोएडा डीएम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश (फाइल फोटो)
यह पूरा मामला नोएडा में अप्रैल महीने के दौरान हुए श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। इस प्रदर्शन में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय की 25 वर्षीया छात्रा आकृति चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बाद में 13 मई को नोएडा प्रशासन ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा दिया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए आकृति चौधरी ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर की थी।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को रद्द किया था NSA
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को अपने फैसले में छात्रा पर लगाए गए एनएसए को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि अधिकारियों का वफादारी का दायरा संविधान के प्रति होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक सत्ता के प्रति। कोर्ट ने नोएडा डीएम के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज करते हुए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था और इसे डीएम की तनख्वाह से वसूलने का आदेश जारी किया था।
अब इस पूरे मामले पर 7 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के खिलाफ नोएडा डीएम मेधा रूपम और यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के फैसले के पैरा 27 से 33 के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें डीएम के खिलाफ टिप्पणियां और मुआवजे का आदेश शामिल था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रा की रिहाई और एनएसए रद्द करने वाले फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई है। अदालत अब इस पूरे मामले पर 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगी।
