कटनी : मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए आने वाले समय में बड़ी सौगात मिलेगी। प्रदेश की बहुप्रतीक्षित और देश की सबसे लंबी जल-सुरंग 'स्लीमनाबाद टनल' का निर्माण अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का स्थल निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। 17 वर्षों की कठिन चुनौतियों बाद यह सुरंग अब जल्द ही नर्मदा के जल को विंध्य के खेतों तक पहुंचाने के लिए तैयार है।
सीएम मोहन यादव ने स्लीमनाबाद टनल का किया निरीक्षण
ग्रेविटी से बहेगा नर्मदा का जल
स्लीमनाबाद टनल न केवल देश की सबसे लंबी जल-सुरंग है, बल्कि यह तकनीक का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है। 11.952 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली इस टनल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नर्मदा का पानी बिना किसी पंपिंग सिस्टम के, पूरी तरह से 'ग्रेविटी फ्लो' (गुरुत्वाकर्षण) के माध्यम से प्रवाहित होगा। इससे न केवल सिंचाई व्यवस्था सुगम होगी, बल्कि बिजली की भी भारी बचत होगी। निर्माण के दौरान टनल बोरिंग मशीन (TBM), कोर ड्रिलिंग और उन्नत ग्राउटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया गया है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन के नीचे से गुजरते हुए भी किसी संरचना को कोई नुकसान न पहुंचे।
विंध्य के छह जिलों में आएगी हरियाली
बरगी व्यपवर्तन परियोजना का अहम हिस्सा मानी जाने वाली यह टनल विंध्य क्षेत्र की प्यास बुझाने का मुख्य जरिया बनेगी। इस परियोजना के पूरा होने से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना सहित सात जिलों के करीब 1450 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर (प्रस्तावित 1.85 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता) कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी।
लंबे समय से सूखा प्रभावित रहे विंध्य अंचल के लिए यह टनल किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में फसल उत्पादन में भारी वृद्धि होगी, जो सीधे तौर पर किसानों की आय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी। 17 साल का लंबा संघर्ष अब विंध्य के किसानों के लिए खुशहाली के रूप में सामने आने वाला है, जिससे कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी।
