Moti Bagh Delhi News Today: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत के ढहने की वजह से अबतक पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। इस बीच, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के दो घंटे तक घटनास्थल पर न तो पुलिस पहुंची और न ही प्रशासनिक अधिकारी।
दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी पांच मंजिला इमारत
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के प्रमुख इलाके के पास प्राइवेट हॉस्टल, भोजनालयों और अन्य दुकानों वाली इस कालोनी में पांच मंजिला इमारत 'हॉस्टल डेज' ढहने के बाद मलबे में फंसे लोगों की मदद के लिए लोग उपलब्ध संसाधनों के जरिए राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने भी मदद का हाथ बढ़ाया।
जाखड़ ने सुनाई आपबीती
समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में विनोद जाखड़ ने कहा, ''यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उन छात्रों की मदद के लिए यहां पहुंचे हैं, जिनके पीजी खाली कराए गए हैं और जिन्हें अब चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत है।'' उन्होंने आगे कहा कि हम मौके पर सबसे पहले पहुंचने वालों में से थे।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: सत्य निकेतन में कैसे ढही 50 साल पुरानी इमारत? स्थानीयों ने खोली PG कल्चर और पुराने मकानों की पोल
'मलबे में फंसा था हमारा साथी'
उन्होंने बताया कि हमारा एक साथी भी मलबे में फंसा हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही हम मौके पर पहुंचे और छात्रों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हम लोगों ने छत तोड़ने से लेकर मलबा हटाने तक कई प्रयास किए गए और इस दौरान तीन छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
विनोद जाखड़ ने कहा, ''दो घंटे तक न तो पुलिस पहुंची और न ही एडमिनिस्ट्रेशन, और वहां कोई मेडिकल टीम भी नहीं थी। जब हम मौके पर पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। जो मंजर हमने देखा, मैं उसे बता नहीं सकता... जवाबदेही तय करनी होगी।"
इससे पहले, विनोद जाखड़ ने बताया कि हम जैसे ही मौके पर पहुंचे इमारत गिर चुकी थी... हम वहां पर मलबा हटाने की कोशिश करने लगे। हम लोग तीन लोगों को निकालने में कामयाब रहे, लेकिन एक की मौत हो गई। उन्होंने आगे कहा कि आखिर कब तक छात्र सरकार के करप्शन की कीमत अपनी जान देकर चुकाएंगे? दिल्ली में आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं- सरकार आंख मूंद कर क्यों बैठी है?
