धार्मिक नगरी उज्जैन में मंदिरों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए एक तरफ जहां देश के पहले टेंपल बांड के जरिए आमजन की सहभागिता से 200 करोड़ रुपए जुटाने की अनोखी योजना पर काम तेजी से चल रहा है, वहीं दूसरी ओर इस पर तीखा राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पी.सी. शर्मा ने इस पूरी योजना को आड़े हाथों लेते हुए इसे धर्म का धंधा करार दिया है।
11 मंदिरों के विकास के लिए 200 करोड़ के टेंपल बॉन्ड लाने की तैयारी
योजना के बारे में बात की जाए तो यूडीए अध्यक्ष रवि सोलंकी ने बताया कि उज्जैन के 11 प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए कुल 1124 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा देश में पहली बार ऐसा प्रयोग किया जा रहा है, जिसमें शेयर बाजार की तरह 11 मंदिरों के टेंपल बांड की ऑनलाइन खरीदी-बिक्री (ट्रेडिंग) होगी। इसमें आम नागरिक भी सीधे सहभागी बन सकेंगे।
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एक-डेढ माह में बांड जारी होने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। कुल 1124 करोड़ रुपए के इस प्लान में 308 करोड़ रुपए की सरकारी सब्सिडी (ग्रांट) शामिल है। इसके अलावा, यूडीए की गारंटी पर 600 करोड़ रुपए बैंक से लोन लिया जा रहा है, और बाकी 200 करोड़ रुपए के लिए ये टेंपल बांड लाए जा रहे हैं।
इस योजना के तहत कालभैरव, मंगलनाथ, सिद्धवट, सांदीपनि आश्रम, मां बगलामुखी (नलखेड़ा), अंगारेश्वर महादेव, भूखी माता, गढ़कालिका, शनि मंदिर, नवग्रह मंदिर और 84 महादेव श्रृंखला के मंदिर शामिल हैं। इन विकास कार्यों के पूरा होने से ये स्थल बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेंगे। बांड जारी करने की 80% प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह है।
'धर्म के नाम पर नहीं होना चाहिए ऐसा धंधा'
इस योजना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने सरकार को घेरा है और कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पी.सी. शर्मा ने आरोप लगाया कि मंदिरों के नाम पर बांड जारी करना धर्म का धंधा बन जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि जिसके पास ज्यादा बांड होंगे, वह मंदिर पर अपना एकाधिकार जताने लगेगा। उन्होंने अयोध्या में चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां चढ़ावे की चोरी पर न तो कोई जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई। ऐसे में सरकार का यह नया हथकंडा सही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार के पास मंदिरों के लिए खुद का पैसा नहीं है....? सरकार कर्ज लेकर बांड इशू करवा रही है, जो सरासर गलत है।
'यदि यह धंधा नहीं रुका, तो बड़े स्तर पर आंदोलन और यात्राएं निकाली जाएंगी'
पूर्व मंत्री ने सुझाव दिया कि यदि सरकार के पास मंदिरों के लिए बजट नहीं है, तो वह सीधे भक्तो से कहे, श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और दान से मंदिरों का निर्माण करवा देंगे। सरकार को यह काम खुद करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह धंधा नहीं रुका, तो इन मुद्दों को लेकर भी भविष्य में बड़े स्तर पर आंदोलन और यात्राएं निकाली जाएंगी।
