देश में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे लोगों की रसोई और घर के बजट पर दिखाई देने लगा है। चीनी से लेकर खाद्य तेल, दाल और मसालों तक की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर जानने के लिए 'टाइम्स नाउ नवभारत' संवाददाता 'आशीष गुप्ता' ने बरेली की प्रमुख थोक मंडी श्यामगंज और रिटेल दुकानों पर पहुंचकर रियलिटी चेक किया।
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श्यामगंज मंडी में दुकानदारों ने बताया कि कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। महंगे खाद्य तेल, दाल, मसाले और चीनी ने ग्राहकों की खरीदारी का तरीका भी बदल दिया है। पहले जो ग्राहक महीने भर का राशन एक साथ खरीद लेते थे, अब वे अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से कम मात्रा में सामान खरीद रहे हैं।
महंगाई का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं
रिटेल दुकानदारों के मुताबिक महंगाई का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिक्री के पैटर्न में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। ग्राहक अब ब्रांड, मात्रा और कीमत की तुलना करने के बाद ही सामान खरीद रहे हैं। कई ग्राहक जरूरत से ज्यादा सामान लेने के बजाय उतनी ही मात्रा खरीद रहे हैं, जितनी तत्काल जरूरी है।
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'राशन के खर्च में बढ़ोतरी के कारण दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है'
ग्राहकों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों की कीमत बढ़ने से महीने का हिसाब बिगड़ रहा है। राशन के खर्च में बढ़ोतरी के कारण दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। किसी ने बाहर खाना कम किया तो किसी ने गैर-जरूरी खरीदारी रोक दी।
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आने वाले दिनों में आम परिवारों का बजट कितना और प्रभावित होगा?
श्यामगंज मंडी की तस्वीर साफ संकेत देती है कि महंगाई का असर सिर्फ बाजार की कीमतों में नहीं, बल्कि आम आदमी की खरीदारी की आदतों में भी दिखाई दे रहा है। सवाल यही है कि अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में यह दबाव लंबे समय तक बना रहा, तो आने वाले दिनों में आम परिवारों का बजट कितना और प्रभावित होगा?
बरेली से Ashish Gupta की रिपोर्ट...
