भाई-बहन के अनोखे रिश्ते और भावनाओं का त्योहार है रक्षाबंधन। इस रिश्ते में जो प्रेम का भाव है, उसे और भी खास बनाता है राखी का धागा। यह राखी का धागा देश के हजारों कारीगरों, छोटे कारोबारियों और स्थानीय बाजारों के लिए भी बेहतरीन अवसर लेकर आता है। हर साल रक्षाबंधन से पहले ही बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों का संसार सज जाता है और मांग भी बढ़ जाती है। इस साल रक्षाबंधन का त्योहार शुक्रवार 28 अगस्त को मनाया जाना है, लेकिन आप अपने आसपास बाजारों में हर तरफ राखी के रंग-बिरंग धागे लटके देख पा रहे होंगे। राखी के धागे को भाई-बहन के प्रेम का पवित्र धागा माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में राखी का डिजाइन, कच्चे माल और कारीगरी का अंदाज भी अलग दिखाई देता है। देश के किसी हिस्से में रेशम और जरी का इस्तेमाल करके राखी बनाई जाती है तो कहीं मोती, स्टोन, मिरर वर्क और पारंपरिक कढ़ाई करके रखाबंधन का धागा तैयार किया जाता है। यही वजह है कि देश के कुछ शहर सदियों से राखी निर्माण और थोक कारोबार का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। चलिए आज उन शहरों और उनकी खास राखी बनाने की कला के बारे में जानते हैं -
अपनी अलग राखी के लिए मशहूर हैं ये शहर
स्टोन राखी और गुलाबी नगरी जयपुर
जयपुर अपनी कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरी के लिए दुनियाभर में मशहूर है। जयपुर की कारीगरी की झलक यहां बनने वाली राखियों में भी दिखती है। यहां की राखियों में पारंपरिक राजस्थानी डिजाइन, रंगीले राजस्थान के चमकीले रंग और सजावटी काम प्रमुख आकर्षण होते हैं। जयपुर की स्टोन राखियां खासतौर पर पसंद की जाती हैं। इनमें अलग-अलग तरह के पत्थरों और सजावटी सामान का इस्तेमाल होता है। पारंपरिक डिजाइन और आकर्षक रंगों का मिश्रण इन्हें अलग पहचान देता है। अगर आप ऐसी राखी देखें तो समझ जाएं कि यह जयपुरी राखी है।
जरी राखी का गढ़ कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता सदियों से संस्कृति और पारंपरिक कला का बड़ा केंद्र रहा है। राखी निर्माण में भी इस शहर की अलग शैली दिखती है। यहां रेशमी धागों, मोतियों, सजावटी सामग्री और बारीक कारीगरी से राखियां तैयार की जाती हैं। यहां की जरी राखी खास आकर्षण होती है। जरी के काम के साथ पारंपरिक सजावट इसे अलग रूप देती है।
फैंसी राखी में अग्रणी आगरा
ताज नगरी आगरा सिर्फ पर्यटन का केंद्र नहीं है। इस पुराने शहर में अलग-अलग त्योहारों से जुड़े उत्पादों के भी बड़े बाजार हैं। आगरा में अलग-अलग डिजाइन की फैंसी राखियां तैयार करके बेची जाती हैं। पारंपरिक लुक के साथ आधुनिक सजावट वाली राखियां यहां की विशेषता है।
भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पवित्र धागा है राखी
नजाकत लिए हुए लखनऊ की राखी
नवाबों के शहर लखनऊ की पहचान उसकी तहजीब, नजाकत और पारंपरिक कारीगरी से जुड़ी है। शहर का यही प्रभाव यहां की राखियों में भी दिखता है। शहर के कारीगर कढ़ाई, जरी और सजावटी काम के जरिए राखियों को बहुत ही आकर्षक रूप देते हैं। इन राखियों में बारीक कारीगरी और कलात्मक डिजाइन पर खास जोर रहता है। यहां की राखियां पारंपरिक और प्रीमियम लुक वाली होती हैं।
सिल्वर राखी अहमदाबाद का आकर्षण
अहमदाबाद को आधुनिक उद्योग और पारंपरिक कला के मेल के लिए जाना जाता है। राखी निर्माण में भी गुजरात के इस प्रमुख शहर के प्रयोग और पारंपरिक डिजाइन का मिश्रण देखने को मिलता है। गुजराती मोटिफ, कढ़ाई और सजावटी चीजों वाली राखियों के अलावा सिल्वर राखी भी इस शहर की खासियत है। अपने अलग डिजाइन और पारंपरिक कारीगरी के कारण अहमदाबाद में तैयार राखियों की मांग काफी रहती है।
वाराणसी की पारंपरिक डिजाइन वाली राखी
वाराणसी को दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है। इस शहर की पहचान बनारसी वस्त्र और हथकरघा परंपरा से जुड़ी है। इसी पारंपरिक कारीगरी का असर यहां के राखी डिजाइन में भी देखने को मिलता है। यहां तैयार होने वाली राखियों में पारंपरिक पैटर्न और सजावटी काम का इस्तेमाल किया जाता है।
सूरत में बीड्स, मिरर और जरी वर्क
सूरत भारत की डायमंड कैपिटल है। हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र के रूप में सूरत की पहचान है। लेकिन शहर की कारोबारी पहचान सिर्फ हीरा उद्योग तक ही सीमित नहीं है। यहां राखी निर्माण और सजावटी उत्पादों का कारोबार भी होता है। सूरत की राखियों में बीड्स, मिरर वर्क और जरी का इस्तेमाल होता है। डिजाइन में बारीकी और सजावट पर ध्यान दिए जाने के कारण यहां की राखियां अलग ही दिखाई देती हैं।
गुलाबी नगरी की स्टोन वर्क राखी हो, कोलकाता की जरी वाली राखी हो, लखनऊ की कढ़ाई वाली राखी हो, अहमदाबाद की सिल्वर राखी या वाराणसी की पारंपरिक डिजाइन वाली राखी, इनकी खासियत बताती है कि भारत में एक ही त्योहार से जुड़ा उत्पाद भी किस तरह अलग-अलग क्षेत्रों की कला और संस्कृति को अपने भीतर समेटे हुए है।
इस बार जब बहन आपकी कलाई पर इनमें से कोई भी राखी बांधे तो कुछ पल ठहरकर इसके पीछे कारीगरों की मेहनत, देश के अलग-अलग हिस्सों की हस्तशिल्प परंपराओं की कहानी को भी याद करें।
