राजस्थान में राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में विशेष अभियान समूह (SOG) की कार्रवाई में दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। इन डॉक्टरों पर आरोप है कि इन्होंने बिना मरीज देखे फर्जी पर्चियां बनाकर अनावश्यक जांचें और गलत बिलिंग की। कई मामलों में रिपोर्ट को बदलकर और एक ही जांच को कई बार दिखाया और सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया गया।
सांकेतिक फोटो
बिना मरीज देखे बनती थीं रिपोर्ट
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने सोमवार को बताया कि एसओजी ने सीकर स्थित बी. लाल लैब के संचालक डॉ. बनवारी लाल उर्फ बी. लाल और एस.के. अस्पताल में कार्यरत डॉ. कमल अग्रवाल उर्फ के.के. अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि दोनों डॉक्टरों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर आरजीएचएस योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। जांच में सामने आया है कि मरीजों को बिना देखे ही फर्जी परामर्श पर्चियां तैयार की जाती थीं। इन पर्चियों के आधार पर अनावश्यक जांचें, विशेषकर एमआरआई, लिखी जाती थीं। कई मामलों में सामान्य जांच को "कॉन्ट्रास्ट एमआरआई" दिखाकर अधिक बिल बनाए गए।
एक ही टेस्ट से कई बिल
एसओजी के अनुसार, एक ही जांच को कई बार दिखाकर पांच से छह रिपोर्टें आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड कर अतिरिक्त भुगतान प्राप्त किया गया। इसके अलावा कई मामलों में मरीज की असली रिपोर्ट की तारीख बदलकर पोर्टल पर अपलोड की गई और सरकारी धन का गलत तरीके से भुगतान लिया गया। एक मामले में मरीज की एमआरआई रिपोर्ट चार दिसंबर 2023 की थी, लेकिन उसे पांच दिसंबर 2023 दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया गया, जबकि संबंधित मरीज उस दिन सीकर में मौजूद ही नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि कई मरीजों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके नाम पर दावा कर भुगतान प्राप्त किया जा रहा है।
नेटर्वक में शामिल लोगों की जांच जारी
अधिकारियों ने बताया कि डॉ. कमल अग्रवाल मुरलीपुरा स्थित शिव वाटिका क्षेत्र के निवासी हैं, जबकि डॉ. बनवारी लाल सीकर के बसंत विहार के रहने वाले हैं। एसओजी ने कहा कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य चिकित्सकों और लैब कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
(इनपुट - भाषा)
