Rajasthan High Court News: राजस्थान हाईकोर्ट ने आने वाली पीढ़ियों यानी Gen Z, Gen Alpha और Gen Beta के समग्र कल्याण और उनके सामने खड़ी बड़ी चुनौतियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार के अंतर, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल बर्नआउट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्टेटस रिपोर्ट और एक्शन प्लान पेश करें।
राजस्थान हाईकोर्ट (फाइल फोटो- ecommitteesci)
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कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
अदालत ने कहा कि ये पीढ़ियां वर्ष 2047 में भारत का नेतृत्व करेंगी, लेकिन देश के सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी ढांचे, मेडिकल सुविधाओं और आधुनिक तकनीक की कमी जैसी कई कमियों से जूझ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए शिक्षण संस्थानों में AI और डिजिटल लर्निंग को अपनाना जरूरी है।
हालांकि, कोर्ट ने चेतावनी भी दी कि AI पर अत्यधिक निर्भरता से बच्चों की स्वतंत्र सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और हाथ से लिखने या किताबें पढ़ने जैसे बुनियादी कौशल खत्म हो सकते हैं, इसलिए तकनीक को इंसानी दिमाग के विकल्प के बजाय केवल एक टूल के रूप में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
पेपर लीक पर जताई चिंता
पेपर लीक के मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि Gen Z इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है, जिससे उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके लिए सरकारों को एक फुल-प्रूफ सिस्टम बनाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और FSSAI की गाइडलाइंस के बावजूद सुरक्षित पोषण न मिलने पर भी अदालत ने सरकारों की जवाबदेही तय की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने तीनों पीढ़ियों का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकीलों और अधिवक्ताओं के अलग-अलग पैनल भी नियुक्त किए हैं।
