Punjab E20 Policy: पंजाब में E20 नीति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार किसान संगठनों के निशाने पर आ गई है। चंडीगढ़ में आयोजित किसान विधानसभा में 16 किसान संगठनों ने राज्य सरकार पर E20 नीति का बिना ठोस आकलन किए विरोध करने का आरोप लगाया। किसान नेताओं ने कहा कि केवल राजनीतिक विरोध के लिए किसी नीति का विरोध करना समाधान नहीं है।
किसानों के निशाने पर भगवंत मान सरकार
सरकार को केंद्र के साथ संवाद कर पंजाब के किसानों की वास्तविक चिंताओं को उठाना चाहिए। आजाद किसान मोर्चा की ओर से आयोजित किसान विधानसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि E20 नीति का पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। खास तौर पर फसलों की मांग, खरीद, कीमत, मार्केटिंग और किसानों की आय पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का पहले से आकलन किया जाना जरूरी है। किसान संगठनों ने मांग की कि अगर E20 नीति या इससे जुड़ी किसी नीति में बदलाव के कारण फसलों की मांग, खरीद या कीमत प्रभावित होती है, तो किसानों के लिए उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।
विरोध के लिए विरोध समाधान नहीं
किसान विधानसभा के प्रस्ताव में कहा गया कि E20 नीति का विरोध केवल विरोध के लिए करना उचित नहीं है। पंजाब सरकार को केंद्र सरकार के सामने किसानों की चिंताओं को मजबूती से रखना चाहिए और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही किसान संगठनों ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि धान के विकल्प के तौर पर मक्का, गन्ना समेत दूसरी फसलों के लिए सुनिश्चित बाजार, उचित मूल्य और खरीद की गारंटी होनी चाहिए, ताकि नीतिगत बदलावों का आर्थिक नुकसान किसानों को न उठाना पड़े।
MSP और मूंग खरीद को लेकर भी सरकार पर हमला
किसान विधानसभा में पंजाब सरकार की MSP पर फसलों की खरीद व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। खास तौर पर मूंग की खरीद में कथित नाकामी को लेकर सरकार को घेरा गया। किसान संगठनों ने कहा कि केवल घोषणाओं से किसानों को जमीन पर राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने MSP पर खरीद के लिए पूरी तरह जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
किसानों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा
किसान नेताओं ने किसानों और MGNREGA वर्कर्स के विरोध प्रदर्शनों के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस, वाटर कैनन और गिरफ्तारियों का भी विरोध किया। खास तौर पर खन्ना में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का आरोप लगाया गया। किसान विधानसभा ने मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों और मजदूरों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई बंद की जाए। बैठक में बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से हुए फसल नुकसान के मुआवजे में देरी का मुद्दा भी उठाया गया। किसान संगठनों ने मांग की कि गिरदावरी और नुकसान के आकलन की प्रक्रिया समयबद्ध हो और मुआवजे का भुगतान बिना अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनों के किया जाए।
ड्रग्स और बेअदबी के मामलों पर भी सरकार को घेरा
किसान विधानसभा में पंजाब में बढ़ते ड्रग्स के खतरे और नशे के कारोबार से जुड़े बड़े आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया। किसान संगठनों ने बड़े ड्रग किंगपिन के खिलाफ राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित युवाओं के पुनर्वास और रोजगार के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की। वहीं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़ी बेअदबी की घटनाओं को लेकर भी किसान संगठनों ने चिंता जताई। उन्होंने मामलों की तेजी से और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
स्थायी संवाद व्यवस्था बनाने की मांग
किसान संगठनों ने पंजाब सरकार से किसानों के साथ नियमित बातचीत के लिए स्थायी और संस्थागत संवाद तंत्र बनाने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों से जुड़े बड़े नीतिगत फैसलों पर राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर नियमित तौर पर चर्चा होनी चाहिए। किसान विधानसभा के समापन पर इन सभी मुद्दों को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें भगवंत मान सरकार से जनता और किसानों की शिकायतों को नजरअंदाज करना बंद करने तथा इन लंबित मुद्दों के समाधान के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान जारी करने की मांग की गई।
