पटना : बिहार में अब जमीन खरीद पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। यदि आप मिडिल क्लास से आते हैं और राजधानी पटना में जमीन लेकर घर बनाना चाहते हैं तो अब यह काफी महंगा हो सकता है। मिडिल क्लास के पटना में जमीन खरीद पाना अब दूर के चांद को चाहने जैसा प्रतीत होगा। इसकी वजह यह है कि जमीन की कीमतें अब पहले अधिक हो सकती हैं। लिहाजा अब जमीन खरीद पाना हर किसी के बस की बात नहीं होगी।
(सांकेतिक फोटो-Istock)
दरअसल, बिहार सरकार पटना में 9 साल बाद जमीनों के सर्किल रेट बढ़ाने जा रही है। इस फैसले के बाद राजधानी पटना के प्राइम लोकेशन में जमीनों की कीमतें 6 से 7 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा होने की संभावना है। जिला निबंधन कार्यालय ने जमीन के सर्किल रेट (MVR) को बढ़ाने का एक बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके लागू होते ही जमीन की सरकारी कीमतें 4 गुना तक बढ़ सकती है।
बोरिंग रोड, अटल पथ, गोला रोड, नहर रोड के किनारे की व्यावसायिक जमीन की सरकारी कीमत (सर्किल रेट) चार गुनी तक बढ़ेगी। इसी तरह शहर की सभी पुरानी व्यावसायिक प्रधान सड़कों के पास की जमीन की सर्किल दर मार्केट वैल्यू के हिसाब से 410 प्रतिशत तक यानी चार गुना से अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
जमीन के कितने बढ़े दाम
पटना के कई प्रमुख इलाकों में प्रस्तावित बढ़ोतरी बेहद चौंकाने वाली है। राजाबाजार, खाजपुरा, मीठापुर, फ्रेजर रोड, जमाल रोड, एग्जीबिशन रोड, कंकड़बाग, खेतान मार्केट, पटना मार्केट, हनुमान नगर, बोरिंग रोड, गांधी मैदान और बेली रोड जैसे इलाकों में सर्किल दर 400 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। शेखपुरा में यह बढ़ोतरी करीब 390 प्रतिशत तक हो सकती है। वहीं अनीसाबाद, न्यू पाटलिपुत्र, पाटलिपुत्र कॉलोनी, लोदीपुर, राजेंद्रनगर गुमटी, काजीपुर, खगौल रोड और न्यू बाइपास रोड में 350 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान है। बंगाली टोला, कदमकुआं और सादिकपुर योगी में 320 प्रतिशत, जबकि जक्कनपुर में करीब 300 प्रतिशत तक सर्किल दर बढ़ सकती है।
जमीन के दाम
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सर्किल दर में समय-समय पर बढ़ोतरी होती रही है। साल 2010 में जहां सर्किल दर 5 लाख रुपये थी, वहीं 2011 में यह सीधे 10 लाख रुपये हो गई, यानी लगभग 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की दई। साल 2012 में यह 12.20 लाख रुपये (22 प्रतिशत), 2013 में 23.40 लाख रुपये (92 प्रतिशत), 2014 में 21.06 लाख रुपये (करीब 10 प्रतिशत) और 2016 में 40 लाख रुपये तक पहुंच गई, जिसमें 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके बाद से सर्किल दर में कोई बदलाव नहीं हुआ।
