महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर दिए गए अपने विवादित बयान पर कायम हैं। बुधवार को अहमदाबाद में Times Now Navbharat से बातचीत के दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि वह अपने बयान में एक शब्द भी नहीं बदलेंगे। चव्हाण ने न तो बयान वापस लेने की बात कही और न ही उस पर दोबारा विचार करने की इच्छा जताई।
पृथ्वीराज चव्हाण ने सुप्रीम कोर्ट पर अपने बयान को सही ठहराया
बयान बदलने से इनकार
जब चव्हाण से पूछा गया कि क्या उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं रहा, तो उन्होंने कहा कि उनका पिछला बयान स्पष्ट था और मीडिया में भी प्रकाशित हुआ था। चव्हाण ने साफ शब्दों में कहा, “मैंने जो कहा था, उसमें एक शब्द भी नहीं बदलूंगा। मैं अपने बयान पर कायम हूं।” बयान पर पुनर्विचार करने के सवाल पर उन्होंने कहा, “बिल्कुल नहीं। मैंने जो कहा था, वह बिल्कुल सही था।”
सुप्रीम कोर्ट में फैसलों की देरी पर उठाए थे सवाल
इससे एक दिन पहले गुजरात के आनंद में एक कार्यक्रम के दौरान चव्हाण ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों के फैसलों में देरी पर गंभीर सवाल उठाए थे। महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिल रहा है। चव्हाण ने कहा था, “मैं ‘डरा हुआ’ शब्द इस्तेमाल नहीं करूंगा, लेकिन हमें सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिल रहा है।”
महाराष्ट्र की राजनीति का जिक्र
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि 40 विधायकों को 50-50 करोड़ रुपये देकर खरीदा गया और सरकार दो से तीन साल तक चलती रही। उन्होंने इस घटनाक्रम से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कई बार फैसला नहीं देना भी अपने आप में एक फैसला बन जाता है। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में समय पर फैसले देने चाहिए। उनके मुताबिक, अगर फैसला बहुत देर से आता है, तो उसका फायदा क्या रह जाता है।
संवैधानिक संस्थाओं को लेकर केंद्र सरकार पर हमला
चव्हाण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए देश की प्रमुख संस्थाओं पर नियंत्रण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई (RBI), सेबी (SEBI) के अलावा सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जैसी जांच एजेंसियों पर भी कब्जा कर लिया गया है। अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए चव्हाण ने क्रिकेट मैच का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि मैच में अंपायर को फिक्स कर दिया जाए, तो एक पक्ष चाहे कुछ भी करे, उसे आउट नहीं दिया जाएगा और मैच का नतीजा पहले से तय हो जाएगा।
संस्थाओं में पारदर्शिता बहाल करने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने संवैधानिक और अन्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने की मांग की। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि संस्थाओं में वैसी पारदर्शिता होनी चाहिए, जैसी संविधान में परिकल्पित की गई थी। चव्हाण ने अपनी बात रखते हुए कहा, “संविधान बचाओ, देश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ।”
