Rath Yatra 2024: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दर्शन के लिए लाखों भक्त पुरी पहुंचते हैं। इस साल 25 लाख भक्तों के जगन्नाथ रथ यात्रा में आने की उम्मीद है। यह यात्रा पुरी जगन्नाथ ही नहीं, बल्कि देशभर में देखी जाती है, लेकिन ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा प्रमुख है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की द्वितीया तिथि को पुरी रथ यात्रा शुरू होती है।
फाइल फोटो।
रथ का निर्माण कार्य शुरू
बता दें कि 12वीं शताब्दी के पुरी जगन्नाथ मंदिर देश का प्राचीन मंदिर है। रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलराम जी और सुभद्रा जी को रथ पर बैठाया जाता है। वे यहां से तीन किमी दूर अपनी मौसी के घर 'गुंडिचा मंदिर' जाते हैं। इस दौरान भक्त रथ को खींचते हैं। रथों को खींचना भक्त अपना सौभाग्य मानते हैं।
पुरी जगन्नाथ जी महाप्रभु की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के रथ निर्माण कार्य अनुकूल समय से शुरू हो चुका है। पवित्र अक्षय तृतीया के दिन से तीनों रथों के लिए तीन लकड़ी का पूजन होने के बाद रथ निर्माण कार्य शुरू हुआ है। निर्माण कार्य के प्रारंभिक चरण के लिए चार चरणों में आवश्यक रथ की लकड़ी आ चुकी है और बड़दांड पहुंच गई है।
रथ निर्माण में जुटे 200 लोग
तीनों रथ को निर्माण कार्य में 200 लोग लगे हुए हैं। कुछ छोटे बच्चे भी रथ के निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। रथ का निर्माण कार्य खत्म होने के बाद प्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा रथ के ऊपर विराजमान होंगे और यात्रा करेंगे। कारीगर ने बताया कि भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलराम एवं बहन सुभद्रा के लिए यात्रा में रथों का निर्माण पंच तत्वों यानी लकड़ी, धातु, रंग, वस्त्र एवं सजावटी सामग्री से किया जाता है। विभिन्न प्रकार के औषधीय गुणों से परिपूर्ण नीम की लकड़ी का उपयोग रथ निर्माण में होता है।
बता दें कि गुंडिचा मंदिर पहुंचने से पहले मंदिर में विशेष इंतजाम किए जाते हैं। यहां उन्हें अलग-अलग तरह के पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है। यहां सात दिन तक भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलराम एवं बहन सुभद्रा रहते हैं और वापस मंदिर को प्रस्थान करते हैं।
