प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के लिए एक न्यास का गठन करने संबंधी अध्यादेश की वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी। अदालत में बुधवार को जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो राज्य सरकार की ओर से हलफनामा दायर कर कहा गया कि राज्य की विधायिका द्वारा उक्त अध्यादेश के संबंध में एक विधेयक पारित किया गया है, जिस पर राज्यपाल की मंजूरी प्रतीक्षारत है।
बांके बिहारी मंदिर (फाइल फोटो)
न्यूज एजेंसी भाषा के हवाले से न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की पीठ ने राज्य सरकार की ये दलील सुनने के बाद मामले की सुनवाई स्थगति करने का आदेश दिया ताकि याचिकाकर्ता उक्त कानून को चुनौती दे सके या फिर लंबित रिट याचिका में संशोधन की अर्जी दायर कर सके। श्री बांके बिहारी जी और दो अन्य लोगों द्वारा यह याचिका दायर की गई है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने की ये मांग
उधर, प्रख्यात रामकथा वाचक एवं पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने वृंदावन स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर को अपने नियंत्रण में लेने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मस्जिदों और चर्च के खिलाफ ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता तो मंदिरों के मामले में भी ऐसा नहीं होना चाहिए। मंदिर के लिए न्यास स्थापित करने और बांके बिहारी गलियारा विकसित करने की राज्य सरकार की योजना पर पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने यह टिप्पणी की।
वृन्दावन के तुलसी पीठ छत्तीसगढ़ कुंज में पिछले एक सप्ताह से श्रीमद्भागवत कथा पाठ कर रहे रामभद्राचार्य ने कहा, ‘‘'मेरी समझ में नहीं आता कि जब सरकार किसी मस्जिद या चर्च पर नियंत्रण नहीं कर सकती तो मंदिर को ही क्यों अपने नियंत्रण में लेकर उसका कोष हड़पना चाहती है।रामभद्राचार्य ने सरकार द्वारा मंदिर का न्यास बनाए जाने पर भी अपना विरोध दर्ज कराया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता को एक अध्यादेश के माध्यम से एक न्यास की स्थापना एवं गलियारे के निर्माण का कारण बताया है।
