चैत्र नवरात्र 2023: प्रयागराज में यहां माता का दरबार है डिजिटल, भक्तों की होती है मनोकामना पूरी, जानें इस पौराणिक मंदिर की कहानी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 14, 2023, 07:22 PM IST

Chaitra Navratri 2023: त्रेता युग में मां कल्याणी की 32 अंगुल ऊंची प्रतिमा की महर्षि याज्ञवल्क्य ने यहां पर स्थापना कर आराधना की थी। तब से ही इस स्थान पर देवी मां की पूजा अर्चना का दौर जारी है। पुरातत्व विभाग के डाॅ. सतीश चन्द्र काला के मुताबिक, माता रानी की ये प्रतिमा शोध में 1500 साल पुरानी पाई गई है। कर्ण मंदिर के पास बैठकर रोजाना मां गंगा की पूजा-अर्चना के बाद सवा मन सोने का दान किया करते थे।

KEY HIGHLIGHTS
  • इस स्थान पर गिरी थी माता सती की दो उंगलियां
  • कर्ण मंदिर के पास बैठ कर करते थे रोज सवा मन सोने का दान
  • पुरातत्व शोध में मां की प्रतिमा 1500 साल पुरानी बताई गई है


Chaitra Navratri 2023: पौराणिक आस्था की तीर्थ नगरी प्रयागराज में स्थित शक्तिपीठ माता कल्याणी देवी के दर पर रोजाना हजारों भक्त शीश नवाने आते हैं। आश्विन व चैत्र नवरात्रि के मौके पर तो नौ दिनों तक मां के आराधकों की भारी भीड़ यहां जुटती है। संगम नगरी की 3 व 51 शक्तिपीठों में से एक है माता रानी कल्याणी देवी का मंदिर है।

Kalyani Temple Prayagraj

प्रयागराज में शक्तिपीठ देवी कल्याणी का मंदिर हुआ हाईटेक (फाइल फोटो)

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इस स्थान पर सती माता की दो उंगलियां गिरी थी। कल्याणी देवी का मंदिर प्रयागराज का अतिप्राचीन एवं पुराणों में वर्णित शक्तिपीठ है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक, त्रेता युग में मां कल्याणी की 32 अंगुल ऊंची प्रतिमा की महर्षि याज्ञवल्क्य ने यहां पर स्थापना कर आराधना की थी। तब से ही इस स्थान पर देवी मां की पूजा अर्चना का दौर जारी है। प्रयागराज के पुरातत्व विभाग के क्यूरेटर डाॅ. सतीशचन्द्र काला के मुताबिक, माता रानी की ये प्रतिमा शोध में 1500 साल पुरानी पाई गई है।

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