तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के एक पुराने बयान से जुड़े मानहानि मामले पर सोमवार को प्रयागराज की जिला अदालत में सुनवाई होगी। यह मामला ब्राह्मणों की कुछ उपजातियों को लेकर उनके द्वारा की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। अदालत ने पहले इस मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया था और स्वामी रामभद्राचार्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रामभद्राचार्य के खिलाफ मानहानि केस पर आज प्रयागराज कोर्ट में सुनवाई (File Photo)
सुरेश चंद्र उपाध्याय ने दाखिल किया परिवाद
वाराणसी के रहने वाले याचिकाकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर 2026 को अदालत में यह परिवाद दाखिल किया था। शिकायतकर्ता ने स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ मानहानि के अपराध में कार्रवाई करने, उन्हें अदालत में तलब करने और दंडित करने की मांग की है। मामले में एसीजेएम कोर्ट संख्या-8 ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया गया था। अब सुनवाई के दौरान उनके पक्ष से जवाब दिए जाने की बात है।
वृंदावन में भागवत कथा के दौरान टिप्पणी का आरोप
याचिकाकर्ता के मुताबिक, स्वामी रामभद्राचार्य ने 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में भागवत कथा के दौरान ब्राह्मणों की कुछ उपजातियों को लेकर टिप्पणी की थी। इसमें उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक समुदायों का जिक्र किया गया था। शिकायत में रामभद्राचार्य के हवाले से कहा गया है कि कुछ ब्राह्मण समुदायों को उनके यहां उच्च कुल का नहीं माना जाता और उनके साथ वैवाहिक संबंध नहीं बनाए जाते। बयान में विद्यार्थियों को पढ़ाने के बदले पैसे लेने का भी जिक्र था।
शिकायतकर्ता ने शादी-विवाह में बाधा आने का दावा किया
सुरेश चंद्र उपाध्याय का आरोप है कि रामभद्राचार्य एक संत हैं और उनके अनुयायी उनकी बातों को महत्व देते हैं। इस तरह के बयान के बाद उपाध्याय समाज को लोग हेय दृष्टि से देखने लगे हैं, जिससे समाज के युवाओं और युवतियों की शादियों में रुकावटें आने लगी हैं। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि पुलिस कमिश्नर से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सोमवार को होने वाली सुनवाई में अदालत के समक्ष इसी परिवाद पर आगे की कार्यवाही होगी।
