बिहार में स्वास्थ्य महकमे की हाल किसी से छिपी नहीं है। विपक्ष आमतौर पर सरकारी खामियों नाकामियों की तरफ इशारा करता है। सामान्य तौर पर विपक्ष के आरोपों को लोग एजेंडा भी मान लेते हैं। लेकिन बिहार के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव ने जब अपने महकमे को जमीनी स्तर पर जानने समझने की कोशिश की तो वो खुद दंग रह गए। तेजस्वी यादव कहते हैं कि राज्य में एक डॉक्टर पिछसे 12 साल से लापता है लेकिन वो सैलरी ले रहा है। अब वो फाइल उनके पास आई है। यही नहीं वो कहते हैं कि कुछ डॉक्टर पांच साल से कुछ 2 साल से अनुपस्थित हैं लेकिन सरकार से वेतन ले रहे हैं। अब इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी।
बिहार के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री हैं तेजस्वी यादव
705 डॉक्टर 6 महीने से गैर मौजूद
तेजस्वी यादव ने कहा कि करीब 705 ऐसे डॉक्टर हैं जो पिछले 6 महीने से गैर मौजूद हैं और वेतन ले रहे हैं लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। उन सभी गैर जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वो कहते हैं यह बताने में कष्ट हो रहा है कि ग्रामीण इलाकों में तैनात डॉक्टर अपने सेंटर पर नहीं जाते हैं बल्कि उसकी जगह शहरों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रेफरल सिस्टम में भी बदलाव करने जा रहे हैं ताकि कोई मरीज जिला अस्पताल से रेफर हुए बगैर पटना ना आए। जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को और चाकचौबंद करने के उपाय किए जा रहे हैं।
बायोमेट्रिक सिस्टम का डॉक्टर कर रहे हैं विरोध
अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ यादव की टिप्पणी उस समय आई है, जब स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बायोमेट्रिक मशीनों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया गया। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने विरोध किया है।बिहार के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 7,000 डॉक्टरों ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन के रूप में बाहरी रोगी विभाग की ड्यूटी से परहेज किया।बीएचएसए यह भी मांग कर रहा है कि सरकार डॉक्टरों के दैनिक और साप्ताहिक ड्यूटी घंटे तय करे, खाली रह गए डॉक्टरों के 45% पदों को भरें, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने से पहले डॉक्टरों के साथ चिंताओं पर चर्चा करें।
