Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशी चयन की नीति में बड़ा बदलाव करने का मन बना लिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार लगभग 30–35% सीटों पर नए उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी है। इसमें करीब 20 मौजूदा विधायकों का टिकट कट सकता है, जबकि 2020 में हार चुके लगभग 10 दावेदारों को दोबारा मौका मिलने की संभावना बेहद कम है।
जे.पी. नड्डा ने पटना में कोर कमेटी बैठक कर समीक्षा की। (Photo- ANI)
टिकट बंटवारे की कसौटी
बीजेपी ने तय किया है कि उम्मीदवारों का आकलन उम्र, सक्रियता और प्रदर्शन के आधार पर होगा। 70 वर्ष से ऊपर के विधायक, कम अंतर से जीतने-हारने वाले और लगातार कमजोर प्रदर्शन करने वाले नेताओं पर कैंची चल सकती है। पार्टी का मानना है कि इस बदलाव से सीट-दर-सीट एंटी-इंकम्बेंसी को कम किया जा सकेगा।
शीर्ष नेतृत्व की सीधी निगरानी
बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने पटना में कोर कमेटी बैठक कर समीक्षा की है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 और 27 सितंबर को पटना में क्षेत्रीय बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। बिहार को पाँच ज़ोन में बाँटकर हर क्षेत्र से प्रत्याशियों की पड़ताल की जाएगी।
उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया
हर विधानसभा क्षेत्र से 5–7 संभावित नाम सामने लाए जा रहे हैं। इनमें से 2–3 नाम राज्य समिति दिल्ली भेजेगी और अंतिम मुहर केंद्रीय चुनाव समिति लगाएगी। इसमें संगठन की सर्वे रिपोर्ट, जिलाध्यक्षों का इनपुट और पिछले चुनाव का रिकॉर्ड अहम आधार बनेगा।
एंटी-इंकम्बेंसी को तोड़ने की रणनीति
बीजेपी की पूरी कोशिश है कि बूढ़े और निष्क्रिय चेहरों की जगह जोशीले और नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाए। संगठन का मानना है कि यही फार्मूला एंटी-इंकम्बेंसी की सबसे बड़ी काट साबित होगा।
